Category Archives: MOTIVATIONAL STORY

कभी न कभी तो किंग ही बनेंगे 

*कितना सुंदर होता है, UPSC में फेल हो जाना !*
एक कोरा (quora.com) यूजर हैं, नाम है अकंद सितरा.
*अकंद ने UPSC का एग्जाम दिया , क्लियर नहीं हुआ. फिर से दिया, फिर नहीं हुआ.* 
लेकिन रोए नहीं कतई. 
*कोरा पर एक सवाल आता है कि IAS अफसर बनने का सफ़र कितना खुशनुमा होता है ?*
उसका जवाब दिया अकंद ने… 
*लेकिन जवाब IAS बनने के बारे में न था, नहीं बनने के बारे में था ।*
ये उनका एक खुला ख़त ह .. उन सभी के लिए…. 
*जो UPSC के लिए पूरी मेहनत करते हैं… बार-बार ट्राय करते है फिर भी फेल हो जाते हैं. यह सिर्फ उनके लिए ही नहीं, उन सभी के लिए जो किसी न किसी एग्जाम में फेल हुए हैं ।*
अकंद ने ये पोस्ट कोरा पर अंग्रेजी में लिखी थी… में उसका अनुवाद पेश कर रहा हूँ
*अकंद लिखता है….*
मुझे अपना छोटा सा इतिहास देने की इजाजत दें ।
*सिविल सर्विसेज 2013- इंटरव्यू फेल*

*सिविल सर्विसेज 2015- मेन्स फेल*

*सिविल सर्विसेज 2016- प्रीलिम्स फेल*

*RBI मैनेजर पोस्ट 2015- इंटरव्यू फेल*

*SSC CGL 2015- टायर 2 फेल*
हर साल, मैं किसी न किसी एग्जाम के फाइनल राउंड तक पहुंचता हूं और फिर बाहर हो जाता हूं ।
*फाइनल लिस्ट में हमेशा कुछ नंबरों से रह गया, बार बार… हर बार…।*
इतना करीब… फिर भी कितना दूर…
*तीन साल की कड़ी मेहनत और दिन रात की पढ़ाई के बावजूद भी..* 
सवालो का उठना स्वाभाविक था…
*कुछ सवाल मेरे मन भी बवंडर की तरह उठे ।*
क्या मैंने अपना समय बर्बाद किया?

कैसा रहा ये सफ़र? 

क्या मैं खुश हूं? 
*मेरी एक सिंपल सी जिंदगी में ऐसे बहुत से सवाल है…*
इसमें सबसे बड़ा सवाल था…
*ख़ुशी असल में होती क्या है?*
अलग-अलग समय पर इसकी परिभाषाएं बदलती रहती हैं ।
हर साल.. 
*10 लाख लोग सिविल सर्विस एग्जाम के लिए अप्लाई करते हैं । उनमें से कितने लोग असल में खुश हैं?*
हर साल… 
*5 लाख से ज्यादा लोग प्रीलिम्स नहीं दे पाते हैं… या तो वो भूल जाते हैं… या काम और परिवार की वजह से एग्जाम देने नहीं जा पाते हैं ।* 
उन्होंने अप्लाई किया है तो… क्वालीफाई करने की चाहत तो होगी ही न । 
*और ये बात कि वो एग्जाम दे ही नहीं पाए हैं, उन्हें उदास तो करती ही होगी ।*
हर साल…
*4 लाख 85 हजार से ज्यादा लोग प्रीलिम्स क्लियर नहीं कर पाते ।* 
कुछ पढ़कर पेपर देते हैं… कुछ टाइम पास के लिए… 
*लेकिन न सेलेक्ट होने पर खुश तो नहीं ही होते हैं न ।*
हर साल…
*जो 15 हजार लोग प्री क्लियर कर मेन्स का एग्जाम देते हैं, उसमें से 12 हजार बाहर हो जाते हैं ।* 
5 दिन लगाकर 9 कठिन पेपर देते हैं, साल भर मेहनत से पढ़ाई करने के बाद । 
*मेन्स न क्लियर कर पाने के बाद वो तो बहुत दुखी होते हैं ।*
हर साल…
*जो 3 हजार इंटरव्यू देते हैं, उनमें से 2 हजार शॉर्टलिस्ट नहीं होते… वो तो बिखर ही जाते हैं ।* 
कुछ नंबरों से रह जाते हैं… और उनका करियर एक साल रिवर्स हो जाता है ।
और…
*आखिरी हजार लोगों में से 900 खुश नहीं होते… क्योंकि अपने मन की पोस्ट नहीं मिलती ।*
ITS, IIS, IRTS में मेरे कई दोस्त हैं, जिनका मोहभंग हो चुका है… क्योंकि वो जिन पोस्ट्स पर हैं, उनका चार्म नहीं है ।
*चार्म तो बस IAS, IPS और IFS का है… बाकी सब तो नॉर्मल सरकारी नौकरी होती हैं।*
तो, क्या वो खुश हैं? 
*अगर उन्हें एक नंबर और मिल जाता, वो IAS बन सकते थे… ये बात उनकी आत्मा को कांटे की तरह चुभती रहेगी, हमेशा ।* 
इतना पास, फिर भी कितना दूर…
*टॉप 100 में से, आखिरी के 30 लोग नाखुश होते हैं… क्योंकि उनको अपनी चॉइस के कैडर नहीं मिलते ।* 
जिसे मुंबई चाहिए, उसे नागालैंड मिल जाता है… ऐसी जगह भेज दिया जाता है जहां की बोली, भाषा, कल्चर, कुछ भी उन्हें समझ नहीं आता  । 
*अगर एक नंबर ज्यादा आया होता तो वो अपने स्टेट में होते… या अपने शहर में… सिर्फ एक नंबर ।*
इतना पास, फिर भी कितना दूर…
*तो 10 लाख लोगों में 9 लाख, 99 हजार, 950 लोग नाखुश हैं… अलग, अलग कारणों से ।*
अजीब है न…
*क्या हमें हमारी मानसिक स्थिति उन चीजों के हिसाब से तय करनी चाहिए, जो हमारे वश में नहीं हैं?*
क्या हमारी ख़ुशी मात्र किसी एग्जाम में पास होने पर निर्भर रहती है?
*क्या हमें उन चीजों के बारे में दुखी होना चाहिए, जो बदल नहीं सकतीं?*
मैं नहीं जानता… ये आप तय करें । मैं बताता हूं… मुझे कैसा लगता है… ।
*बिना किसी इनकम के, मम्मी-पापा के पैसों पर एक उदास कमरे में रहते हुए, खुद को 3 साल घिसने के बावजूद कुछ भी न कर पाने के बाद भी मुझे संतोष है ।*
हां, मुझे खुद से संतोष है… 
*क्योंकि इस सफ़र में मैं बहुत बदल गया हूं…मेरे अनुभवों ने मुझे बदल दिया है… मेरी बेहतरी के लिए ।*
में बिल्कुल बदल गया हूँ…
*2013 में जब मैं कॉलेज में था… एक बेवकूफ, इम्मैच्योर लड़का था… क्लास का जोकर था ।*
बिल्कुल यूज़लेस… 
*मुझसे लोग चिढ़ जाते थे और कभी सीरियसली नहीं लेते थे… पूरे कॉलेज में ,मेरा मजाक उड़ता था ।*
और उसके बाद.. 
*मैंने एग्जाम की तैयारी शुरू की… सिविल सर्विस के लिए मुझे बहुत कुछ पढ़ना पड़ा: देश-दुनिया की हिस्ट्री, जॉग्रफी, पॉलिटी, इकोनॉमिक्स, एनवायरनमेंट, एथिक्स, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, सोशियोलॉजी, करेंट अफेयर्स, साइंस और इस आसमान के नीचे की हर चीज ।*
इन तीन सालों में, 
*आप कह सकते हैं, मैंने इन सभी सब्जेक्ट्स में MA कर लिया था । 10 अलग-अलग सब्जेक्ट्स में MA ।*
इतना ही नही…
*SSC के लिए मैंने मैथ्स, इंग्लिश, रीजनिंग और लॉजिक पढ़ा.. वो भी हाई लेवल का…  3 BA तो कर ही लिए होंगे… ।*
बात यह पर नही रुकती…
*RBI के लिए बैंकिंग, फाइनेंस, इंश्योरंस, और पैसो के बारे में पढ़ा… सभी RBI रिपोर्ट्स को गहराई से पढ़ा ।*
इसका परिणाम यह हुआ कि…
*3 साल के बाद में एक जोकर… एक बेवकूफ लड़के से एक मैच्योर… एक समझदार आदमी बन गया था ।*
अब ज़टका देने का समय आ गया…
*जब दोस्तों से मिलता, वो शॉक हो जाते कि कोई इतना कैसे बदल सकता है ।*
अब मैं बेवकूफ नही रहा…
*किसी भी टॉपिक पर कितनी भी देर बात कर सकता था… डिबेट करता था… हर  चीजों पर अपनी राय रखता था…* 
जब जब में बात करता था  मैं स्मार्ट लगता था..  
*अब वो दोस्त मेरी जेन्युइन रेस्पेक्ट करते लगे थे ।*
मुझे और क्या चाहिए था?
*इतने सारे एक्साम्स को शुक्रिया, कि मैंने एक एग्जाम पास कर लिया… होम मिनिस्ट्री में अब मेरी एक अच्छी नौकरी है ।*
इस सफ़र के अंत में…
*मेरे पास एक 60 हजार रुपए प्रति महीने की नौकरी है ।*
इस सफ़र के अंत में… 
*मुझे मेरा प्यार मिल गया है, जिसने मेरे सबसे बुरे समय में मेरा साथ दिया ।*
इस सफ़र के अंत में… 
*मुझे इज्जत मिली है… दोस्तों, मम्मी-पापा, परिवार, रिश्तेदार, और कोरा पर ।*
इस सफ़र के अंत में… 
*मैं ज्यादा समझदार, ज्ञानी और जानकार हूं ।*
इस सफ़र के अंत में…
*मैंने सीख लिया है कि जिंदगी अच्छी या बुरी नहीं… जिंदगी बस जिंदगी है ।*
यह भी सही है कि…
*जब-जब मैं कोई एग्जाम पास नहीं कर पाया… मुझे लगता था मैं गिर गया हूं ।*
दुख और डिप्रेशन से घिर जाता था… कुंठित हो गया था… 
*फिर से फेल हुआ… फिर बार-बार फेल हुआ… और ये समझ गया कि गिरना कुछ नहीं होता ।*
बार बार हारा तो क्या हुआ…
*जो चीजें मेरे वश में नहीं है, उन पर फ्रस्ट्रेट होने का कोई तुक नहीं है । किस्मत को कोसने का कोई फायदा नहीं है ।*
मैंने सीखा है कि 
*जो मैं हूं, मुझे उसके बारे में खुश रहना चाहिए और ये समझने के बाद मैं सुकून में हूं, पहले से कहीं बेहतर कर रहा हूं ।*
अब…
*क्या मैं इन सब एग्जाम्स में फेल हुआ हूं? हां… ।*
अब…
*क्या मैं जिंदगी में फेल हुआ हूं? नहीं… बिलकुल नहीं…।*
मैं अपने जीवन से प्यार करता हूं… 
*सफल नहीं हुआ तो क्या, मैं खुश हूं…। मेरे पास वो सब नहीं, जो मैं चाहता था… पर वो सब है, जिसकी मुझे जरूरत थी ।*
और मुझे क्या चाहिए?
*तो हां, ये एक खुशनुमा सफ़र था. एक अच्छा अनुभव! लेकिन क्या ये अंत है? नहीं, मैंने अभी बस शुरुआत की है।*

એક વખતની વાત…….

ઇતિહાસમાં બનેલી એક સમાન બે ઘટનાના પરિણામો સાવ જુદા હતા.
સિકંદરે 

જ્યારે 

પોરસને કેદ કર્યો

ત્યારે 

સિકંદરે પોરસને પુછ્યુ હતું કે, 

“બોલ,

તારી સાથે કેવું વર્તન કરવામાં આવે ?”
 પોરસે જવાબ આપ્યો હતો કે, 

*એક રાજા બીજા રાજા સાથે જેવું વર્તન કરે એવું વર્તન તમારે મારી સાથે કરવું જોઇએ.*
 સિકંદરે પોરસને કેદમાંથી મુક્ત કર્યો 

અને 

એને પોતાના રાજ્યનો પ્રતિનિધી બનાવ્યો.
મહમદઘોરીએ આવી જ રીતે પૃથ્વીરાજને કેદ કર્યો 

અને 

એણે પણ 

પૃથ્વીરાજને આવો જ પ્રશ્ન કર્યો કે,
*મારી પાસે તમારી શું અપેક્ષા છે ?*
 પૃથ્વીરાજ એ પણ પોરસ જેવો જ જવાબ આપેલો. 

*મેં તમને અનેક વખત જવા દિધા છે તમારે પણ મારી સાથે સન્માનપૂર્વક વર્તવું જોઇએ.* 
પૃથ્વીરાજની આ માંગ બાદ 

મહમદ ઘોરીએ 

એની આંખો ફોડાવી નાખીને 

પછી મૃત્યંદંડની સજા કરી હતી.
એક સમાન બે ઘટના

પણ જુદા પરિણામો શા માટે ?
 આ પ્રશ્નના જવાબ માટે સિકંદર અને મહમદઘોરીના જીવનનો થોડો અભ્યાસ કરીએ ત્યારે ખ્યાલ આવે કે,
*સિકંદરના શિક્ષક અને માર્ગદર્શક એરીસ્ટોટલ હતા*

*અને*

*કમનસિબે મહમદઘોરીને આવા કોઇ વ્યક્તિની સંગત નહોતી.* 
તમે કોની સાથે બેસો છો?

કોની સાથે સમય વિતાવો છો? 

કોઇની સાથે રહ્યા પછી તમારા જીવનમાં શું શું પરિવર્તન આવે છે? 

આ બધું બહું જ મહત્વનું છે. 
*કોઇ સારી વ્યક્તિની સંગત  તમારા જીવનને માનવતાવાદી બનાવી શકે છે…*

એક વખતની વાત……..

SSC માં ભણતા એક વિદ્યાર્થીનું રિઝલ્ટ આવ્યુ. 
માતા-પિતાએ તેને કહ્યુ, “ચાલ બેટા, આજે આપણે શહેરની સારામાં સારી હોટેલમાં જમવા જવાનુ છે.” 
છોકરાને સુખદ આશ્ચર્ય થયુ, કારણ કે માતા-પિતા સામાન્ય પરિસ્થિતિના હતા અને આવી ક્યારેય તેને ઓફર આવી ન હતી. 
માતા-પિતા અને છોકરો, એમ ત્રણેય તૈયાર થઇ હોટેલમાં જમવા ગયા. છોકરાને ભાવતી વાનગી ઓર્ડર કરી ત્રણેય જમ્યા… જમવાનુ પત્યા પછી 
પિતાએ હળવેક થી દિકરાને માથે હાથ ફેરવી કહ્યુ, “બેટા, તને ખબર છે, તું SSC માં નાપાસ થયો છે? 
દિકરાના પગ નિચેથી જમીન ખસી ગઇ પણ 
પિતાએ તેને સંભાળતા ક્હ્યુ, “કઇ વાંધો નહિ, આ કોઇ તારી જિંદગીની કસોટી ન હતી. એટલુ યાદ રાખજે. ભણવાનુ પાસ કરવાથી તુ કદાચ સફળ થઇશ, પણ જિંદગીમા આવનારા ઉતાર ચઢાવને હિમ્મત અને ધીરજથી પાસ કરવાથી તુ સુખી અને મહાન બનીશ… 
આ વિદ્યાર્થી એટલે આજનો મોટા ગજાનો કલાકાર અનુપમ ખેર. આ પ્રસંગે તેની જિંદગી બદલી નાખી નેએ નિષ્ફળતા ને પણ ઉજવતા શિખ્યા. ઓછા ટકા આવવાથી સંતાનને ખાવા કરડવા દોડતા વાલીઓ જરા ચેતજો. સંતાનને કાયમ માટે ગુમાવવાનો વારો ન આવે…

Self-confidence बढाने के 10 प्रैक्टिकल तरीके

1)  Dressing sense improve कीजिये :आप  किस  तरह  से  dress-up होते  हैं  इसका  असर  आपके  confidence पर  पड़ता  है । ये  बता  दूँ  कि  यहाँ  मैं  अपने  जैसे आम लोगों  की  बात  कर  रहा  हूँ , Swami Vivekanand और  Mahatma Gandhi जैसे  महापुरुषों  का  इससे  कोई  लेना  देना  नहीं  है , और  यदि  आप  इस  category में  आते  हैं  तो  आपका  भी :)।
 मैंने  खुद  इस  बात  को  feel किया  है , जब  मैं  अपनी  best attire में  होता  हूँ  तो  automatically मेरा  confidence बढ़  जाता  है, इसीलिए  जब  कभी  कोई  presentation या  interview होता  है  तो  मैं  बहुत  अच्छे  से  तैयार  होता  हूँ । दरअसल  अच्छा  दिखना  आपको  लोगों  को  face करने  का  confidence देता  है  और  उसके  उलट  poorly dress up होने  पे  आप  बहुत conscious रहते  हैं ।
मैंने  कहीं  एक  line पढ़ी  थी-
 आप  कपड़ों  पे  जितना  खर्च  करते  हैं  उतना  ही  करें , लेकिन  जितनी  कपडे  खरीदते  हैं  उसके  आधे  ही खरीदें।
 आप भी इसे अपना सकते हैं।

वो  करिए   जो  confident लोग  करते  हैं :
आपके  आस -पास  ऐसे  लोग  ज़रूर  दिखेंगे  जिन्हें  देखकर  आपको  लगता  होगा  कि  ये व्यक्ति  बहुत  confident है । आप  ऐसे  लोगों  को  ध्यान  से  देखिये  और  उनकी  कुछ  activities को  अपनी  life में  include करिए । For example:
Front seat पर  बैठिये ।

Class में , seminars में , और  अन्य  मौके  पर  Questions पूछिए / Answers दीजिये

अपने चलने और बैठने के ढंग पर ध्यान दीजिये

दबी  हुई  आवाज़  में  मत  बोलिए ।

Eye contact कीजिये , नज़रे  मत  चुराइए।

3)  किसी  एक   चीज  में  अधिकतर  लोगों  से  बेहतर   बनिए :

 

हर  कोई  हर  field में  expert नहीं  बन सकता  है, लेकिन  वो  अपने  interest के  हिसाब  से  एक -दो  areas चुन  सकता  है  जिसमे  वो  औरों  से  बेहतर  बन  सकता  है । जब  मैं   School में  था  तो  बहुत  से  students मुझसे  पढाई  और  अन्य  चीजों  में  अच्छे  थे , पर  मैं  Geometry  में  class में  सबसे  अच्छा  था (thanks to Papa :)), और  इसी  वजह  से  मैं  बहुत  confident feel करता  था।  और  आज  मैं  AKC को  one of the world’s most read Hindi Blog बना  कर  confident feel करता  हूँ। अगर  आप  किसी  एक  चीज  में  महारथ  हांसिल  कर  लेंगे  तो  वो  आपको  in-general confident बना  देगा । बस  आपको  अपने  interest के  हिसाब  से  कोई  चीज  चुननी  होगी  और  उसमे  अपने  circle में  best बनना  होगा, आपका  circle आप पर  depend करता  है , वो  आपका  school, college, आपकी  colony या  आपका  शहर  हो  सकता  है।
आप  कोई  भी  field चुन  सकते  हैं, वो कोई  art हो  सकती  है , music, dancing, etc कोई  खेल  हो  सकता  है , कोई  subject हो  सकता  है  या  कुछ  और जिसमे आपकी expertise  आपको  भीड़  से  अलग  कर  सके  और आपकी  एक  special जगह  बना  सके । ये  इतना  मुश्किल  नहीं  है , आप  already किसी  ना  किसी  चीज  में  बहुतों  से  बेहतर  होंगे , बस  थोडा  और  मेहनत  कर  के  उसमे  expert बन  जाइये, इसमें  थोडा  वक़्त   तो  लगेगा ,  लेकिन  जब  आप  ये  कर  लेंगे  तो  सभी  आपकी  respect करेंगे  और  आप  कहीं  अधिक  confident feel करेंगे ।
और  जो  व्यक्ति  किसी  क्षेत्र  में  special बन  जाता है  उसे  और  क्षेत्रों  में  कम   knowledge होने की चिंता  नहीं होती, आप  ही  सोचिये  क्या  कभी सचिन  तेंदुलकर इस  बात  से  परेशान  होते  होंगे  कि  उन्होंने  ज्यादा  पढाई  नहीं  की …कभी  नहीं !

 4)  अपने  achievements  को  याद  करिए  :
आपकी  past achievements आपको  confident feel करने  में  help करेंगी। ये  छोटी -बड़ी  कोई  भी  achievements हो  सकती  हैं । For example: आप  कभी  class में  first आये  हों , किसी  subject में school top किया  हो , singing completion या  sports में  कोई  जीत  हासिल  की हो,  कोई  बड़ा  target achieve किया  हो , employee of the month रहे  हों । कोई  भी  ऐसी  चीज  जो  आपको  अच्छा  feel कराये ।
आप  इन  achievements को dairy में  लिख  सकते  हैं, और  इन्हें  कभी  भी  देख  सकते  हैं, ख़ास  तौर  पे  तब  जब  आप  अपना  confidence boost करना  चाहते  हैं । इससे  भी  अच्छा  तरीका  है  कि  आप  इन  achievements से  related कुछ  images अपने  दिमाग  में  बना  लें  और  उन्हें  जोड़कर  एक  छोटी  सी  movie बना  लें  और  समय  समय  पर  इस  अपने  दिमाग  में  play करते  रहे । Definitely ये  आपके  confidence को  boost करने  में मदद  करेगा ।
5) Visualize करिए  कि  आप  confident हैं :
आपकी  प्रबल  सोच  हकीकतबनने  का  रास्ता  खोज  लेती  है , इसलिए  आप  हर  रोज़  खुद  को  एक   confident person के  रूप  में  सोचिये । आप  कोई  भी  कल्पना  कर  सकते  हैं , जैसे  कि  आप  किसी  stage पर  खड़े  होकर  हजारों  लोगों  के  सामने  कोई  भाषण  दे  रहे  हैं , या  किसी  seminar hall में  कोई  शानदार  presentation दे  रहे  हैं , और  सभी  लोग  आपसे  काफी  प्रभावित  हैं , आपकी  हर  तरफ  तारीफ  हो  रही  है  और  लोग  तालियाँ  बजा  कर  आपका  अभिवादन  कर  रहे  हैं । Albert Einstein ने  भी  imagination को  knowledge से अधिक  powerful बताया  है ; और  आप  इस  power का  use कर  के  बड़े  से  बड़ा  काम  कर  सकते  हैं।
6) गलतियाँ   करने  से  मत  डरिये:

7)  Low confidence के  लिए  अंग्रेजी  ना  जानने  का  excuse मत  दीजिये :
हमारे  देश  में  अंग्रेजी  का वर्चस्व  है । मैं  भी  अंग्रेजी  का ज्ञान  आवश्यक  मानता  हूँ ,पर  सिर्फ  इसलिए  क्योंकि  इसके  ज्ञान  से  आप  कई  अच्छी  पुस्तकें , ब्लॉग , etc पढ़  सकते  हैं , आप  एक  से  बढ़कर  एक  programs, movies, इत्यादि  देख  सकते  हैं । पर  क्या  इस  भाषा  का  ज्ञान  confident होने  के  लिए  आवश्यक  है? नहीं ।  English जानना  आपको  और  भी  confident बना  सकता  है  पर  ये  confident होने  के  लिए  ज़रूरी  नहीं  है । किसी  भी  भाषा  का  मकसद  शब्दों  में  अपने  विचारों   को  व्यक्त   करना  होता  है , और  अगर  आप  यही  काम  किसी  और  भाषा  में  कर  सकते  हैं  तो आपके लिए अंग्रेजी  जानने  की  बाध्यता  नहीं  है।
मैं  गोरखपुर  से  हूँ , वहां  के  सांसद  योगी  आदित्य  नाथ  को  मैंने  कभी  अंग्रेजी में  बोलते  नहीं  सुना  है , पर  उनके  जैसा  आत्मविश्वास  से  लबरेज़  नेता  भी  कम   ही  देखा  है । इसी  तरह  मायावती और  मुलायम  सिंह  जैसे  नेताओं में  आत्मविश्वास  कूट -कूट  कर  भरा  है  पर  वो  हमेशा  हिंदी  भाषा का  ही  प्रयोग  करते  हैं ।
दोस्तों, कुछ  जगहों  पर  जैसे  कि job-interview में  अंग्रेजी  का  ज्ञान  आपके  चयन  के  लिए  ज़रूरी  हो  सकता  है, पर  confidence के  लिए  नहीं , आप  बिना  English जाने  भी  दुनिया  के  सबसे  confident  व्यक्ति  बन  सकते  हैं ।

8 ) जो  चीज  आपका आत्मविश्वास  घटाती  हो  उसे  बार-बार  कीजिये :
कुछ  लोग  किसी  ख़ास  वजह  से  confident नहीं  feel करते  हैं । जैसे  कि  कुछ  लोगों में  stage-fear होता  है  तो  कोई  opposite sex के  सामने  nervous हो  जाता  है । यदि  आप  भी  ऐसे  किसी  challenge को  face कर  रहे  हैं  तो  इसे beat करिए । और  beat करने  का  सबसे  अच्छा  तरीका  है  कि  जो  activity आपको  nervous करती  है  उसे  इतनी  बार  कीजिये  कि  वो  आपकी ताकत  बन  जाये । यकीन  जानिए  आपके  इस  प्रयास  को  भले  ही शुरू  में  कुछ  लोग  lightly लें  और  शायद  मज़ाक  भी  उडाएं  पर  जब  आप  लगातार अपने efforts  में लगे  रहेंगे  तो  वही  लोग  एक  दिन  आपके  लिए  खड़े  होकर  ताली  बजायेंगे ।
 गाँधी जी की कही एक  line मुझे  हमेशा  से  बहुत  प्रेरित  करती  रही  है  “पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।”  तो  आप  भी  उन्हें  ignore करने  दीजिये , हंसने  दीजिये , लड़ने  दीजिये, पर  अंत  में आप  जीत जाइये । क्योंकि  आप  जीतने  के  लिए  ही  यहाँ  हैं , हारने  के  लिए  नहीं ।
9) विशेष  मौकों  पर  विशेष  तैयारी  कीजिये :
सफलता  के  लिए  आत्म-विश्वास  आवश्यक  है, और आत्म-विश्वास   लिए तैयारी-Arthur Ashe
जब  कभी  आपके  सामने  खुद  को   prove करने  का  मौका  हो  तो  उसका  पूरा  फायदा  उठाइए । For example: आप  किसी  debate, quiz , dancing या  singing competition में  हिस्सा  ले  रहे  हों , कोई  test या  exam दे  रहे  हो ,या  आप  कोई  presentation दे  रहे  हों , या  कोई  program organize कर  रहे  हों । ऐसे  हर एक  मौके  के  लिए  जी -जान   से  जुट  जाइये  और  बस  ये  ensure करिए  कि  आपने  तैयारी  में  कोई  कमी  नहीं  रखी, अब  result चाहे जो भी  हो  पर  कोई  आपकी  preparation को  लेकर  आप  पर  ऊँगली  ना  उठा  पाए।
Preparation और  self-confidence directly proportional हैं । जितनी  अच्छी  तैयारी  होगी  उतना  अच्छा  आत्म -विश्वास  होगा।और  जब  इस  तैयारी  की  वजह  से  आप  सफल  होंगे  तो  ये  जीत  आपके life की success story में  एक  और  chapter बन  जाएगी  जिसे  आप  बार -बार  पलट  के  पढ़  सकते  हैं  और  अपना  confidence boost कर  सकते  हैं ।
10)Daily अपना  MIT पूरा  कीजिये :
कुछ  दिन  पहले  मैंने  AKC पर  MIT यानि  Most Important Task के  बारे  में  लिखा  था , यदि  आपने  इसे  नहीं  पढ़ा  है  तो  ज़रूर  पढ़िए । यदि  आप  अपना  daily का  MIT पूरा  करते  रहेंगे  तो   निश्चित  रूप  से  आपका  आत्म -विश्वास  कुछ  ही  दिनों  में  बढ़  जायेगा । आप  जब  भी  अपना  MIT पूरा  करें  तो  उसे  एक  छोटे  success के  रूप  में देखें  और  खुद  को  इस  काम  के  लिए  शाबाशी  दें ।रोज़  रोज़  लगातार  अपने  important tasks को  successfully पूरा  करते  रहना  शायद  अपने  confidence को  boost करने का सबसे  कारगर  तरीका  है ।  आप इसे ज़रूर try कीजिये।

Money is yours but resources belongs to society

​*_प्लेट में खाना छोड़ने से पहले रतन टाटा का ये संदेश ज़रूर पढ़ें!_*
*_दुनिया के जाने-माने industrialist Ratan Tata ने अपनी एक Tweet के माध्यम से एक बहुत ही inspirational incident share किया था। आज मैं उसी ट्वीट का हिंदी अनुवाद आपसे शेयर कर रहा हूँ :_*
_पैसा आपका है लेकिन संसाधन समाज के हैं!_
_जर्मनी एक highly industrialized देश है। ऐसे देश में, बहुत से लोग सोचेंगे कि वहां के लोग बड़ी luxurious लाइफ जीते होंगे।_
_जब हम हैम्बर्ग पहुंचे, मेरे कलीग्स एक रेस्टोरेंट में घुस गए, हमने देखा कि बहुत से टेबल खाली थे। वहां एक टेबल था जहाँ एक यंग कपल खाना खा रहा था। टेबल पर बस दो dishes और beer की दो bottles थीं। मैं सोच रहा था कि क्या ऐसा सिंपल खाना रोमांटिक हो सकता है, और क्या वो लड़की इस कंजूस लड़के को छोड़ेगी!_
_एक दूसरी टेबल पर कुछ बूढी औरतें भी थीं। जब कोई डिश सर्व की जाती तो वेटर सभी लोगों की प्लेट में खाना निकाल देता, और वो औरतें प्लेट में मौजूद खाने को पूरी तरह से ख़तम कर देतीं।_
_चूँकि हम भूखे थे तो हमारे लोकल कलीग ने हमारे लिए काफी कुछ आर्डर कर दिया। जब हमने खाना ख़तम किया तो भी लगभग एक-तिहाई खाना टेबल पर बचा हुआ था।_
_जब हम restaurant से निकल रहे थे, तो उन बूढी औरतों ने हमसे अंग्रेजी में बात की, हम समझ गए कि वे हमारे इतना अधिक खाना waste करने से नाराज़ थीं।_
_” हमने अपने खाने के पैसे चुका दिए हैं, हम कितना खाना छोड़ते हैं इससे आपका कोई लेना-देना नहीं है।”, मेरा कलीग उन बूढी औरतों से बोला। वे औरतें बहुत गुस्से में आ गयीं। उनमे से एक ने तुरंत अपना फ़ोन निकला और किसी को कॉल की। कुछ देर बाद, Social Security Organisation का कोई आदमी अपनी यूनिफार्म में पहुंचा। मामला समझने के बाद उसने हमारे ऊपर 50 Euro का fine लगा दिया। हम चुप थे।_
_ऑफिसर हमसे कठोर आवाज़ में बोला, “उतना ही order करिए जितना आप consume कर सकें, पैसा आपका है लेकिन संसाधन सोसाइटी के हैं। दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो संसाधनों की कमी का सामना कर रहे हैं। आपके पास संसाधनों को बर्वाद करने का कोई कारण नहीं है।”_
_इस rich country के लोगों का mindset हम सभी को लज्जित करता है। हमे सचमुच इस पर सोचना चाहिए। हम ऐसे देश से हैं जो संसाधनों में बहुत समृद्ध नहीं है। शर्मिंदगी से बचने के लिए हम बहुत अधिक मात्रा में आर्डर कर देते हैं और दूसरों को treat देने में बहुत सा food waste कर देते हैं।_
_The Lesson Is – अपनी खराब आदतों को बदलने के बारे में गम्भीरता से सोचें। Expecting acknowledgement, कि आप ये मैसेज पढ़ें और अपने कॉन्टेक्ट्स को फॉरवर्ड करें।_
_Very True- “MONEY IS YOURS BUT RESOURCES BELONG TO THE SOCIETY / पैसा आपका है लेकिन संसाधन समाज के हैं।”_
_दोस्तों, कोई देश महान तब बनता है जब उसके नागरिक महान बनते हैं। और महान बनना सिर्फ बड़ी-बड़ी achievements हासिल करना नही है…महान बनना हर वो छोटे-छोटे काम करना है जिससे देश मजबूत बनता है आगे बढ़ता है। खाने की बर्बादी रोकना, पानी को waste होने से बचाना, बिजली को बेकार ना करना…ये छोटे-छोटे कदम हैं जो देश को मजबूत बनाते हैं।_

ગુજરાતી રંગભૂમિ : ભવાઈ અને અસાઇત પટેલ

​ગુજરાતના લોક નાટ્યશાસ્ત્રના શિરમોર સમો એક નાટ્યપ્રયોગ ભવાઈ છે. ગુજરાતી રંગભૂમિના વિકાસનો પાયો નાખનાર ભવાઈનો નાટ્યપ્રયોગ ગુજરાતના રંગમંચ પર હવે ભુલાતો જાય છે. ભવાઇ એટલે ભવની વહી, અર્થાત્ ભવની કથા; જિંદગીની કથા; સંસારની તડકીછાંયડીઓની કથા.
 વિદેશી શાસકોના હિંદુસ્તાન પરના હુમલાઓનો તે સમય. અલ્લાઉદ્દીન ખીલજીના સમયની આ વાત. અલ્લાઉદ્દીન ખીલજીના એક સરદારે સમૃદ્ધ ગુજરાત પર ચઢાઈ કરી. ઉત્તર ગુજરાતના સિદ્ધપુર શહેર તેણે તાબે કર્યું. સિદ્ધપુરનો એક મોવડી હેમાળા પટેલ અને તેને એક સૌંદર્યવતી  યુવાન દીકરી ગંગા.
ખીલજીના સરદારની કુદ્રષ્ટિ ગંગા પર પડી અને હેમાળા પટેલને માથે આભ તૂટી પડ્યું. ત્યારે પટેલનો જિગરજાન બ્રાહ્મણ મિત્ર અસાઈત ઠાકર તેની વહારે ધાયો. કથાકાર તરીકે અસાઈત ઠાકરની નામના હતી. તેમણે સરદારના કાને વાત મૂકી કે ગંગા મારી પુત્રી છે. “અનુપમા”ના વાચકમિત્રો! આપ કલ્પી શકશો આભડછેટનો તે જમાનો? બ્રાહ્મણ કદી પટેલ સાથે એક પંગતે ન જમે! સરદાર કહે કે જો ગંગા તેની પુત્રી હોય તો અસાઈત તેની સાથે એક ભાણે જમે. એક યુવતીના શિયળને ભ્રષ્ટ થતું બચાવવા અસાઈતે ગંગા સાથે ભોજન કર્યું. ગંગા તો બચી ગઈ, પરંતુ  ઠાકરની જ્ઞાતિએ અસાઈત ઠાકરને વટલાયેલો ગણી ન્યાત બહાર કર્યો. અસાઈત ઠાકરને સિદ્ધપુર છોડવું પડ્યું. અસાઈત ઠાકર કુટુંબ સાથે ઊંઝા આવ્યા. હેમાળા પટેલ અને સમસ્ત કડવા પાટીદાર સમાજે અસાઈતનું ઋણ ચૂકવવા તેમના ભરણપોષણની વ્યવસ્થા કરી આપી. કહે છે કે ઊંઝાના પટેલોની કડવા પાટીદાર જ્ઞાતિએ અસાઈત ઠાકરને તથા વારસોને વંશપરંપરાગત આવક મળે તેવા હક્કો લખી આપ્યા.
અસાઈત ઠાકરને સાહિત્ય અને સંગીતનો છંદ. સુંદર સંગીતકથા કરી જાણે. તેમણે લોકભોગ્ય ભાષામાં લાંબા–ટૂંકા ‘વેશ’ લખવા શરૂ કર્યા. પોતાના જ લખેલા અને લોકરુચિને અનુરૂપ સંગીતબદ્ધ કરેલા વેશને અસાઈત ઠાકર અને તેમના પુત્રોએ સમાજને અર્પણ કર્યા. લોકજીવનને વણી લેતા અને લોકમાનસને સ્પર્શી જતા અસાઈત ઠાકરના આ સંગીતપ્રધાન વેશ “ભવાઈ”ના નામે જાણીતા થયા.
સમય વીતતાં ભવાઈ લોકપ્રિય થતી ગઈ અને ભવાઈએ ગુજરાતમાં નાટ્યકળાના વિકાસના નવા દરવાજા ખોલ્યા. ગુજરાતની રંગભૂમિની એ કમનસીબી કે સમાજમાં આવતાં પરિવર્તનને ન પારખી શકતાં ભવાઈ શિક્ષિત કે ‘સુધરેલ’ વર્ગનો ટેકો ગુમાવતી ગઈ અને ક્યારેક તો હલકું મનોરંજન પીરસનાર સામાન્ય સાધન બની રહી ગઈ. ગુજરાતી રંગમંચના ઇતિહાસમાં ગુજરાતી ભાષાના તળપદા, લોકભોગ્ય  નાટ્યપ્રયોગ તરીકે ભવાઈનું મહત્વ અનોખું છે. 

આંતરરાષ્ટ્રીય ફલક પર ગુજરાતી મહિલા: હંસાબહેન મહેતા

​ગુજરાત રાજ્યના પ્રથમ મુખ્ય મંત્રી ડો. જીવરાજ મહેતાનાં ધર્મપત્ની હંસાબહેન મહેતા હતાં.
ભારે રૂઢિવાદી સમાજના જમાનામાં 1897માં તેમનો જન્મ, છતાં. તેમણે 1918માં ફિલોસોફી વિષય સાથે બીએની પરીક્ષા પાસ કરી. પત્રકારત્વના અભ્યાસ માટે હંસાબહેન ઇંગ્લેન્ડ ગયાં. સમાજમાં સ્ત્રીઓના સ્થાન માટે હંસાબહેન ચિંતિત હતાં અને હમેશા સ્ત્રીઓના વિકાસ માટે સક્રિય રહેતાં.
1920માં સ્વિટ્ઝરલેંડની ઈન્ટરનેશનલ કોન્ફરન્સમાં હંસાબહેન મહેતાએ હિંદના બુલબુલ સરોજિની નાયડુ સાથે હિંદુસ્તાનના મહિલા પ્રતિનિધિઓ તરીકે ભાગ લીધો. 1947માં હિંદુસ્તાન આઝાદ થયું અને સ્વતંત્ર ભારતના યુનાઇટેડ  નેશન્સ (યુનો) ખાતેના પ્રતિનિધિ તરીકે હંસાબહેન અમેરિકા ગયા. “અનુપમા”નાં વાચકમિત્રો જાણે છે કે બ્રિટીશ રાજમાં ડો. જીવરાજ મહેતા વડોદરા રાજ્યના દીવાન હતા.
1949માં વડોદરાની મહારાજા સયાજીરાવ યુનિવર્સિટી (એમ. એસ. યુનિવર્સિટી) ના ઉપકુલપતિપદે હંસાબહેન નિમાયાં. ટૂંકમાં, હંસાબહેન મહેતાએ ગુજરાતી મહિલા તરીકે રાષ્ટ્રીય અને આંતરરાષ્ટ્રીય ફલક પર નામના પામી ગુજરાતને ગૌરવ બક્ષ્યું.
“અનુપમા”ના વાચક મિત્રો! આપ જાણો છો કે ગુજરાતી ભાષાની પ્રથમ નવલકથા “કરણઘેલો”ના લેખક નંદશંકર મહેતા હતા. હંસાબહેન ગુજરાતના પ્રથમ નવલકથાકાર અને સુરતનાં સમાજસુધારક નંદશંકર મહેતાના પુત્ર સર મનુભાઈ મહેતાનાં પુત્રી હતાં. 

दौलतमंद दिखकर ही आप दौलतमंद बन सकते हैं

​मैंने एक बार एक आदमी को नौकरी का इंटरव्यू देने जाते देखा। उसके जूते गंदे थे, उसके सिर पर टोप था (जो ऊपर खिसका था), उसकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी और उसने जेब में हाथ डाल रखे थे। आप समझ ही गए होंगे कि इस हुलिए में इंटरव्यू देने पर क्या हुआ होगा – उसे नौकरी नहीं मिली। और उसे मिलेगी भी नहीं, और फिर वह दावा करेगा कि यह अन्याय है, कोई भी उसे मौक़ा नहीं देता है, ज़िदगी बेकार है आदि। मैंने नौकरी के कई इंटरव्यू लिए हैं और देखा है कि लोगों का हुलिया अक्सर गलत प्रभाव डालता है। कोशिश की कमी हमेशा साफ़ झलकती है – तैयारी और रुचि की कमी भी। ‘आप इस कपनी के लिए काम क्यों करना चाहते हैं?’ ‘पता नहीं।’ ‘हम क्या काम करते हैं?’ ‘पता नहीं।’ मैं यहाँ पर खूसट प्रतिक्रियावादी नहीं बन रहा हूँ। लेकिन इस तरफ़ ध्यान दिया जाना चाहिए कि कोशिश की कमी का सीधा संबंध परिणामों की कमी से है। गरीब लोग गरीब दिखते हैं और ऐसा मजबूरी के कारण नहीं होता है। वे तो एक तरह से गरीबी की यूनिफ़ॉर्म पहने होते हैं, जो उन्हें बाक़ी लोगों से अलग कर देती है। क्योंकि लोग उनके साथ अलग तरह का व्यवहार करने लगेंगे। हम वनमानुषों से बहुत ज़्यादा अलग नहीं हैं और एक-दूसरे के प्रति हमारा व्यवहार काफ़ी हद तक इस बात पर आधारित होता है कि वे किस तरह चलते और दिखते हैं। जो लोग कमज़ोर और ज़रूरतमंद दिखते हैं, उनके साथ वैसा ही बताव किया जाता है। शक्तिशाली लोग गर्व से चलते हैं और आत्मविश्वासी दिखते हैं। मैं यह सुझाव दे रहा हूँ कि आपको शक्तिशाली और आत्मविश्वासी दिखना चाहिए। हम सभी को शक्तिशाली और आत्मविश्वासी दिखना चाहिए।

ओह, लेकिन हम दौलतमंद लोगों जैसे पहनावे का खर्च कैसे उठा सकते हैं? छोड़िए भी। मुझे आपसे बेहतर उम्मीद थी। ज़रा गहराई तक सोचें। वनमानुष तो यह काम बिना कपड़ों के ही कर लेते हैं। इसका संबंध आपके पहनावे से उतना नहीं है, जितना इससे है कि आप किस तरह से चलते हैं। इसका संबंध तो आपकी पूरी छवि से है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप भड़कीले या बुरे कपड़ों में ज़्यादा सफल हो सकते हैं। कोई भी स्मार्ट ढंग से कपड़े पहन सकता है। कोई अच्छी पोशाक उधार माँग लें या अच्छा सूट सस्ते में खरीद लें (नहीं, नहीं, पूरी क़ीमत पर नहीं और इसे अपने क्रेडिट कार्ड से न ख़रीदें)। कैसिनो की पहली नौकरी के लिए जब मैं इंटरव्यू देने जा रहा था, तो मैंने एक शानदार सेकड हैंड जैकेट ख़रीदा, जो डबल ब्रेस्टेड और बहुत भड़कीला था। इसके साथ ही सही बो टाई भी, क्योंकि मुझे इलास्टिक टाई पसंद नहीं है। मैंने घंटों तक प्रैक्टिस की, जब तक कि मेरी नज़र में मेरा हुलिया सही नहीं हो गया। जब मैं पहली रात को वहाँ पहुँचा, तो मैं प्रशिक्षु कम, जेम्स बॉण्ड ज़्यादा दिख रहा था। मेरी छाप यादगार और नाटकीय थी। ज़ाहिर है, मैंने गलत अनुमान लगा लिया था और बाद में मुझे हाई स्ट्रीट से एक सादा काला सूट खरीदना पड़ा, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह थी कि लोगों को यह याद रहा कि मैं भीड़ से अलग था और गंदे कपड़ों के बजाय स्टाइलिश कपड़े पहनता था। मुझे वह काम मिल गया, हालाँकि मैं किसी तरह से उसके लायक़ नहीं था। जानते हैं, यह सूत्र कारगर है। दौलतमंद लोगों की तरह पोशाक पहनें, लोग आपको दौलतमंद मान लेंगे और आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेंगे। स्टाइल सीखें, तौर-तरीके सीखें और यह भी सीखें कि दौलतमंद लोग कैसे कपड़े पहनते हैं। गरीब दिखेंगे, तो आपको खराब सर्विस मिलेगी। और आप चाहे जो करें, चिथड़े न पहनें। अमीर मशहूर हस्तियों पर यह फबता है, लेकिन आप पर नहीं। मुझ पर भी नहीं। हमारा लक्ष्य संयत शालीनता होना चाहिए। कुलीन। गुणवत्ता। सादी डिज़ाइन। तराशे हुए बाल। साफ़ नाखून। आप मेरा मतलब समझ गए होंगे!