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स्वामी विवेकानंद का युवाओं को संदेश 

​स्वामी विवेकानंद का युवाओं को संदेश 
LAST UPDATED: JANUARY 12, 2015 BY GOPAL MISHRA 10 COMMENTS

 

आज अत्याधुनिक युग में भी अनेक युवा; स्वामी विवेकानंद जी की बातों का अनुसरण करते हैं एवं उनके उपदेशों को आत्मसात करने का प्रयास कर रहे है। युवाओं में अत्यधिक लोकप्रिय स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं की जिज्ञासाओं का

Swami Vivekananda
समय-समय पर अत्यधिक सहज और तर्क संगत तरीके से समाधान किया है। स्वामी जी के अनेक प्रसंग आज भी हम सभी के लिए पथ-प्रदर्शक हैं। ऐसे ही एक प्रसंग को आप सबसे साझा करने का प्रयास कर रहे हैं।

 

स्वामी विवेकानंद जी जब अलवर प्रवास पर थे तब एक दिन कुछ युवा अपनी जिज्ञासा शांत करने स्वामी जी के पास उपस्थित हुए। इस तरह की बैठक लगभग रोज ही हुआ करती थी। स्वामी जी के प्रभाव का ऐसा असर हुआ कि अलवर में युवाओं का एक समूह बन गया, जो पूर्ण सन्यास नही लेना चाहता था किन्तु आध्यात्म के नियमों के अनुसार जीवन को धर्म की मर्यादा में रहकर जीना चाहता था।
उन युवकों में पूरन नाम का एक युवक था , उसने बात शुरू करते हुए स्वामी जी से कहा कि, स्वामी जी मेरी एक व्यक्तिगत समस्या है। स्वामी जी बोले निसंकोच अपनी समस्या कहो; हो सकता है तुम्हारी समस्या और भी भाइयों से सम्बंधित हो। स्वामी जी के अपनेपन की भावना से अभीभूत होकर  पूरन बोला “स्वामी जी न तो मैं भिक्षा माँग सकता हूँ और न अपने माता-पिता को असहाय अवस्था में छोङ सकता हूँ। घर परिवार की जिम्मेदारी हेतु मुझे आजीविका तो चाहिये।”
स्वामी जी बोले, “आजीविका किसे नही चाहिये पुत्र !”
  पूरन आगे बोला, “स्वामी जी आप हमें सच्चाई से जीना सिखाते हैं,  ईमानदारी और साहस जैसे गुणों की चर्चा करते हैं।  सात्विक और निस्वार्थ सेवा से परिपूर्ण जीवन जीने के लिये कहते हैं; किन्तु क्या ये संभव है?  जो व्यक्ति नौकरी में है, उसके लिये तो ये सेवा निःस्वार्थ नही हो सकती क्योंकि हम इसे आजीविका के रूप में करते हैं। बदले में वेतन लेते हैं और यदि व्यापार की बात करें तो, व्यापार  सत्य एवं सरलता से संभव नही है। व्यापार में तो सच-झूठ बोलना ही पड़ता है। ऐसे में हम इस संसार में नैतिकता की रक्षा कैसे कर सकते हैं।”

स्वामी जी मुस्कराते हुए बोले,  तुम्हारी पीड़ा यथार्त है पुत्र ! नौकरी करते हुए एक बात स्मरण रखो कि तुम जिसके पास नौकरी कर रहे हो, वह तुम्हारा स्वामी है किन्तु तुम्हारा एक स्वामी और भी है, उसने तुमको ये जीवन दिया और इस सृष्टी की रचना की है। नौकरी किसी की भी करो;  किन्तु अपने वास्तविक स्वामी के विरुद्ध कैसे जा सकते हो। यदि स्वार्थवश किसी का अहित करते हो तो अपने वास्तविक स्वामी का उलंघन करते हो। थोङा ईश्वर पर भरोसा करना सीखो,  सत्य के लिये थोङा भरोसा करना सीखो। स्वामी जी हँसते हुए बोले ” अपने सांसारिक लोभ की रक्षा करते हुए हम सात्विक जीवन नही जी सकते। हित और लोभ में अंतर समझो। लोभ में हित नही होता। हित का लोभ करो, लोभ का हित नही। सांसारिक लोभ के प्रवाह में आत्मा का पतन हो जाए तो ये लाभ का सौदा नही है।”
स्वामी जी  थोडा. रुके , फिर चर्चा को आगे बढाते हुए बोले “तुमने कृषी की चर्चा ही नही की। तुम देख रहे हो, जो युवक अंग्रेजी के दो अक्षर पढ लेते हैं वो अपने गॉव को छोङ कर नौकरी के लिये शहर की ओर भाग रहे हैं। वहाँ वह कुर्सी पर बैठकर ऐसे काम करना चाहते हैं कि कपङे और हाँथ गंदे न हों भले ही आत्मा चाहे कितनी भी मलीन हो जाए।”
बातचीत इतनी आत्मीयता के वातावरण में हो रही थी कि और भी युवक बेझिझक अपनी जिज्ञासा को प्रश्नों के माध्यम से पूछ रहे थे। सरमा नामक युवक ने स्वामी जी से कहा कि, खेती में तो न सम्मान है और न पैसा है। जिसको देखिये किसान को हाँककर अपना काम करवा लेता है। ज़मींदार, सरकारी अधिकारी, गॉव का बनिया सब उसके स्वामी बन जाते हैं।

 

स्वामी जी बोले पुत्र, ” अपने स्वभाव को पहचानों और अपने स्वधर्म को जानो। हम लोग एक भूल करते हैं कि, अपने वंश या व्यवसाय के अनुसार अपना स्वभाव बनाने का प्रयत्न करते हैं। जबकि होना चाहिये कि हम अपने स्वभाव के अनुसार अपना व्यवसाय चुनें। अपना वंश चुनना हमारे हाँथ में नही है।”

सरमा वापस बोला, किन्तु स्वामी जी अब किसान क्या कर सकता है! अपने बेटे के हाँथ में हल और बैल ही पकङा सकता है और उसी तरह बनिया अपने बेटे को दुकान पर ही तो बैठा सकता है!
स्वामी जी ने कहा कि पुत्रों एक कथा सुनाता हुँ,  गुरु नानक एक खत्री परिवार के घर में जन्म लिये थे। खत्री संभवतः आरंभ में क्षत्रिय थे; किन्तु किसी समय उनके क्षत्रिय संस्कार छूट गये और वे खत्री हो गए। जब नानक बङे हुए तो उनके व्यापारी पिता ने उन्हे कुछ पुंजी दी और सौदा करके आने को कहा। गुरु नानक अपने वंश के अनुसार नही चले, वे अपने स्वभाव के अनुसार चले। अपनी आर्थिक पूंजी उन्होने आर्थिक लाभ के किसी व्यापार में नही लगाई। वे उसे गरीबों में बांट आए। घर लौटने पर उनके पिता ने पूछा “सौदा कर आए? उन्होने उत्तर दिया, हाँ पिता जी ! सच्चा सौदा कर आया।”
नानक जी की कथा सुनकर सरमा बोला, “स्वामी जी वे गुरु नानक थे इसलिये ऐसा कर पाए। हम साधारण जन ऐसा कैसे कर सकते हैं?”
स्वामी विवेकानंद हँस पङे और बोले ” ये तो सत्य है कि वे गुरु नानक थे, इसलिये ऐसा कर सके; किन्तु तुम अपना विकास कर,  महान पुरुषों के समान व्यवहार क्यों नही कर सकते- यह क्यों नही मानते हो कि  तुममें भी वही ब्रह्म है, जो महान पुरुषों में विद्यमान है। स्वयं पर विश्वास करना  सीखो।
इसबार धनराज ने प्रश्न किया, स्वामी जी ये सब तो ठीक है! पर मुझे आप बताइये कि किसान का बेटा चाहे तो कैसे पढ सकता है और पढ भी जाए तो समय नष्ट करने के सिवाय उसका लाभ क्या होगा?
स्वामी जी बोले पुत्र, ” राजा जनक को स्मरण करो. उनके एक हाँथ में हल था और दूसरे में हाँथ में वेद। इसका अर्थ समझते हो?”
स्वामी विवेकानंद जी ने समझाते हुए कहा कि इसका अर्थ है, “राजा जनक कृषी और ज्ञान को एकसाथ महत्व दे रहे थे। वे सांसारिक ज्ञान और और आध्यात्मिक ज्ञान दोनो का महत्व समझते थे और इसलिये वे किसी की भी उपेक्षा नही करते थे। वैसे राजा जनक अपने राजा के धर्म को निभाने के लिए हल रख कर तलवार भी उठाने में सक्षम थे।”
धनराज ने पूछा कि स्वामी जी राजा जनक का वर्ण क्या था?

स्वामी जी ने कहा कि, ” यदि मुझसे पूछोगे तो मैं यही कहुंगा कि वे ब्राह्मण थे क्योंकि उनका स्वभाव एक अनासक्त ज्ञानी का स्वभाव था; किन्तु प्रजापालन के लिए वे कृषि को महत्व देते थे और प्रजारक्षा के लिए शस्त्रों को। हमारे यहाँ आजकल यह हो रहा है कि जिसको ज्ञान है वह कृषि नही कर रहा और जो कृषि कर रहा उसे किसी प्रकार का ज्ञान नही है। हमें वैज्ञानिक ढंग से खेती करनी चाहिए,  ताकि हमारे खेतों की उपज बढे। हमारे युवक पढ-लिख कर नगरों की ओर नही गाँवों की ओर बढे। हमारे गॉव में जो ज्ञान की भूख है, उसे देखो। पढा-लिखा आदमी जाकर जब ग्रामीणों के बीच बैठता तो वे उसका सम्मान करते हैं। इस प्रकार ऊँच-नीच का भेद कम होता है। समाज में समरसता आती है। स्वामी जी सरमा की तरफ मुखातिब होते हुए बोले सरमा ! तुम भी ज्ञान प्राप्त करके खेती करो।”
स्वामी विवेकानंद जी ने सभी युवाओं की तरफ देखते हुए कहा कि, “तुम लोग संस्कृत और अंग्रेजी दोनो पढो। संस्कृत इसलिए कि अपने देश, अपने धर्म , अपने प्राचीन ज्ञान को जान सको और अंग्रेजी इसलिए कि पश्चिम से आए आधुनिक ज्ञान से परिचित हो सको।”
मित्रों, ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को आने वाली परेशानियों से बचाने के लिए अति-उत्तम उपाय बतायें हैं। आजकल की परिस्थिती पर यदि गौर करें तो अनेक युवा गॉव से शहर पढने आते हैं और आज की गलाकाट मंहगी शिक्षा का बोझ उनके माँ-बाप को कर्ज के रूप में उठाना पङता है। आलम ये है कि शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात युवा गॉव वापस नही जाते क्योंकि व्हाईट कॉलर वाले युवाओं को मिट्टी में काम करना रास नही आता। शहर के हालात ये है कि ज्यादा तनख्वाह की उम्मीद लिये युवकों को उचित रोजगार नही मिलता जिससे वे गलत रास्ते का चयन करके स्वयं को बरबादी के रास्ते पर ले जाते हैं और माँ-बाप की उम्मीद पर पानी फेर देते हैं।
मित्रों, स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस पर हम सब उनके सपनो को साकार करने का प्रण करें और उनके द्वारा बताई गई युवाओं की विशेषता को अंगीकार करें क्योंकि विवेकानंद जी के अनुसार, युवा वो है जो अनिति से लङता है, दुर्गुणों से दूर रहता है, काल की चाल को अपने सामर्थ से बदल सकता है। राष्ट्र के लिए बलिदान की आस्था लिये एक प्रेरक इतिहास रचता है। जोश के साथ होश लिये सभी समस्याओं का समाधान निकाल सकता है। वो सिर्फ बातों का बादशाह नही है; बल्की उत्तम कर्मों द्वारा उसे साकार करने में सक्षम है।
जय भारत 

गुरु-शिष्य की वो मुलाक़ात जिसने स्वामी विवेकानंद का जीवन बदल दिया!

​भारतीय इतिहास के संक्रान्ति काल में अपने गुरु के मंगल आशीर्वाद को शिरोधार्य कर के युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी ने धर्म, समाज और राष्ट्र में समष्टि-मुक्ती के महान आदर्श को प्रस्तुत किया। गुरु रामकृष्ण परमहंस के विचारों को अमृत समान मानने वाले स्वामी विवेकानंद जी जब पहली बार रामकृष्ण से मिले तो उनके मन में रामकृष्ण के प्रति एक विरोधाभास विचार उत्पन्न हुआ था। इस मुलाकात का प्रसंग “न भूतो न भविष्यति” में देखने को मिलता है। ये प्रसंग स्वामी विवेकानंद बनने से पूर्व का है।

भारतीय इतिहास के संक्रान्ति काल में अपने गुरु के मंगल आशीर्वाद को शिरोधार्य कर के युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी ने धर्म, समाज और राष्ट्र में समष्टि-मुक्ती के महान आदर्श को प्रस्तुत किया। गुरु रामकृष्ण परमहंस के विचारों को अमृत समान मानने वाले स्वामी विवेकानंद जी जब पहली बार रामकृष्ण से मिले तो उनके मन में रामकृष्ण के प्रति एक विरोधाभास विचार उत्पन्न हुआ था। इस मुलाकात का प्रसंग “न भूतो न भविष्यति” में देखने को मिलता है। ये प्रसंग स्वामी विवेकानंद बनने से पूर्व का है।
सुरेश बाबु की बात को मानते हुए नरेन्द्र ने कहा, “अच्छा! मैं चलूँगा, किन्तु एक बात कह देता हूँ कि न तो मैं आपके समान उनको अपना गुरु समझुंगा और ना ही उनके कहने पर ब्रह्म समाज छोडूंगा।
सुरेश बाबु नरेन्द्र को लेकर ठाकुर(रामकृष्ण परमहंस) के पास गये। उस समय ठाकुर पूर्व की ओर मुख किये प्रसन्नवदन कर रहे थे। उनके वचन सुनने में नरेन्द्र तल्लीन हो गये। जब ठाकुर की नज़र नरेन्द्र पर पड़ी तो उन्होने कहा कि-
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तुम कक्ष में चटाई पर बैठो।
इतने में सुरेश बाबु ने कहा कि, ये वही है जिसने गाना गाया था। ठाकुर ने नरेंद्र की ओर देखा और पूछा कि, और क्या सीखा है कोई बंगला भजन भी गाते हो।
नरेन्द्र ने कहा बंगला गीत तो दो चार ही आता है। इसपर ठाकुर ने गीत गाने को कहा और हारमोनियम की व्यवस्था भी करवा दी।

नरेन्द्र ने “मन चलो निज निकेतन” गाया, गीत के मध्य में ही ठाकुर अंतर्मुखी हो गये और गीत समाप्त होते-होते ठाकुर की चेतना बहर्मुखी हो गई। वे उठे और वे नरेन्द्र का हाँथ पकड़ कर बाहर बरामदे में उत्तर की ओर खींचते हुए ले गये और एक कमरे में प्रवेश कर गये। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि जौहरी (ठाकुर, रामकृष्ण परमहंस) को हीरे की परख हो गई थी। ठाकुर ने कमरे की कुंडी लगा दी ताकि कोई और आ न सके। नरेन्द्र को देखकर उनकी आँखों से आनन्द के आसुओं की धारा बहने लगी थी। नरेन्द्र की तरफ मुखातिब होकर ठाकुर कहने लगे कि,

 

तू इतने दिनों पश्चात आया। मैं किस प्रकार तेरी प्रतिक्षा करता रहा, तू सोच नही सकता।
नरेन्द्र अचंभित उनको देखते रहे। ठाकुर नरेन्द्र के सामने हाँथ जोड़कर खड़े हो गये और बोलने लगे “मैं जानता हूँ प्रभु! आप वही पुरातन ऋषी-नर रूपी नारायण हैं। जीवों का इस दुर्गति से उद्धार करने के लिये आपने पुनः संसार में अवतार लिया है।”
नरेन्द्र स्तंभित भाव से ठाकुर को देखते रहे। सहसा ठाकुर बोले ठहरो यहीं मेरी प्रतिक्षा करो कहीं जाना नही। ठाकुर कक्ष से बाहर निकल गये।
नरेन्द्र ने चैन की सांस ली और सोचने लगे कि किस पागलखाने में फंस गया। विचित्र सा चेहरा बनाकर वहीं बैठे रहे क्योंकि ठाकुर का आदेश उन्हे सम्मोहन की भाँति वहीं रोके रहा। लेकिन मन में ही वार्तालाप करने लगे कि, मैं तो नरेंन्द्र नाथ हूँ, विश्वनाथ का पुत्र परंतु ये तो ऐसे समझ रहे हैं कि मैं अभी आकाश से उतरा कोई देवता हूँ।

कुछ समय पश्चात ठाकुर कक्ष में प्रवेश किये, उनके हाँथ में माखन मिश्री और कुछ मिठाईयां थी। वे अपने हांथो से नरेन्द्र को मिठाईयां खिलाने लगे। नरेन्द्र ने उनको रोकते हुए कहा कि आप मुझे दे दिजीये मैं अपने मित्रों संग बांटकर खा लूंगा।
ठाकुर के आग्रह में ऐसी शक्ति थी कि नरेन्द्र ज्यादा मना नही कर सके। उनके मुख पर भी माखन लग गया था। ठाकुर भावविभोर खिलाते रहे और पूछते रहे कि, तू शीघ्र ही एक दिन अकेला मेरे पास आयेगा। आयेगा न बोल नरेन्द्र ने स्वीकृती में सर हिला दिया। तब ठाकुर ने कक्ष के कपाट खोल दिये और बाहर आ गये एवं अपने आसन पर जाकर ऐसे बैठ गये मानो कुछ हुआ ही नही।
तभी ठाकुर अपने शिष्यों को सम्बोधित करते हुए कहने लगे कि, “देखो नरेन्द्र सरस्वती के प्रकाश से किस प्रकार दीप्तिमान हैं।”
लोग चकित नरेन्द्र को देखने लगे। नरेन्द्र इस बात से चकित होकर ठाकुर की तरफ देखने लगे।
तभी ठाकुर ने नरेन्द्र से पूछा, “रात को निद्रा से पूर्व क्या तुम्हे कोई प्रकाश दिखाई देता है?”
“विस्मित होकर नरेन्द्र ने कहा जी हाँ! और पूछा, क्या अन्य लोगों को दिखाई नही देता?”

ठाकुर ने दृष्टीउठाकर उपस्थित लोगों से कहा, “देखो ये लड़का अपने जन्म से ही ध्यानसिद्ध है।” तुम लोगों को जैसे देख रहा हूँ, वैसे ही ईश्वर को भी देखा जा सकता है उससे बात की जा सकती है।
लेकिन क्षणिक ही दुखी होते हुए बोले कि, “ऐसा चाहता कौन है? कौन ये कहकर दुःखी होता है?
जैसा नरेन्द्र ने गाया “जाबे कि हे दीन आमार विफले चालिए”, ईश्वर को व्याकुल होकर पुकारो तो वे अवश्य दर्शन देते हैं।
नरेन्द्र मुग्ध भाव से ठाकुर को देखते रहे। फिर उनके पास पहुँच कर अबोध बालक की तरह आँख में आँख डालकर ठाकुर से पूछे कि क्या आपने ईश्वर के दर्शन किये हैं?
ठाकुर खिलखिलाकर हँसे और बोले हाँ मैने देखा है।
नरेन्द्र को ऐसे उत्तर की आशा नही थी वे स्तब्ध रह गये। ठाकुर के विश्वास और ढृणता के कायल हो गये। नरेन्द्र हाँथ जोड़कर बाहर निकल लिये उनके साथ उनके मित्र भी बाहर निकल लिये।
मित्रों, सर्वविदित है कि स्वामी विवेकानंद जी ने अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण की शिक्षाओं का सम्पूर्ण विश्व में संदेश दिया। स्वामी जी के लिये स्वामी रामकृष्ण के आदेश अमृत समान थे।
आइये आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन पर उनका वंदन करते हैं और उनकी दी गई शिक्षाओं को आत्मसात करने का संक्लप करते हैं।

6 steps for online shopping awareness and how to be safe in hindi

​Online Shopping यानि सावधानी हटी दुर्घटना घटी

          

त्योहारों का सीजन कहिए या दीवाली की धूम | October से लेकर नया साल आने तक shoping का लोगों में कुछ ज्यादा ही क्रेज रहता है और होना भी चाहिए क्योंकि ये भी तो हमारी खुशियों का इजहार करने का एक तरीका है | Festival season में कम्पनियां ग्राहकों के लिए अच्छे – अच्छे offer लेकर आती है जैसे ग्राहकों को लुभाने के लिए कम्पनियां विशेष छूट की पेशकश भी करती रहती है | आज का युवा दुकान या Mall में घंटों बर्बाद करने की बजाए online shopping करना पसंद करता है | इसमें कोई शक नहीं कि online shopping बहुत ही सुविधाजनक है लेकिन online shopping का फायदा तभी मिलेगा जब आप समझदारी से योजना बनाकर खरीदारी करेंगे | इसलिए इन लुभावनी छूट का फायदा उठाने के लिए थोड़ी जाँच – पड़ताल करना तो बनता है क्योंकि बिना जाँच – पड़ताल के खरीदारी करने से आपको भारी नुकसान हो सकता है | इसलिए जब भी आप online shopping करें तो कुछ बातों को ध्यान में रखे |
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Special या extra discount की जब हो बात –
Flipkart, Snapdeal या Amazon जैसी e-commerce websites अपने ग्राहकों को credit card या debit card से shopping करने पर discount की पेशकश कर रही है | यह discount 5% से 20% प्रतिशत या फिर इससे ज्यादा भी हो सकता है | Discount तो ठीक है लेकिन आप इस बात की जाँच – पड़ताल जरुर कर ले कि discount की अधिकतम सीमा कितनी है | इन दिनों एक e-commerce website का विज्ञापन आ रहा कि वहां पर न्यूनतम Rs. 5000 की shopping करने पर 5 % discount मिलेगा लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि वहां discount की अधिकतम सीमा Rs. 500 है | ऐसे में अगर आप discount के चक्कर में कोई महंगा समान ( for example Rs. 20,000) ले लेते है तब भी आपको उस सामान पर सिर्फ Rs. 500 की छूट (discount) ही मिलेगी | एक तरह से यह आपका नुकसान ही है | इसलिए discount की अच्छी तरह से जाँच – पड़ताल करके ही shopping करें |
App से खरीदारी करने पर-
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इस समय Mobile app से भुगतान करने का चलन काफी तेजी बढ़ा है जिसमे Paytm , ICICI बैंक का App iMobile , भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का App Buddy और HDFC का PayZapp का नाम सबसे आगे है | ये सभी बहुत ही लुभावने तरीके से ग्राहकों को cashback / reward points की पेशकश करती है | इसलिए इनसे खरीदारी करते समय सावधानी बेहद जरुरी है | अब Paytm को ही ले लिजिए | यदि आप Paytm से खरीदारी करते है तो cashback आप के नाम से वहां बने account में ही जाता है और इस cashback का use करने के किए आपको अगली बार किसी भी खरिदारी का भुगतान उसी से करने के लिए मजबूर होना पड़ जाता है | यही cashback यदि आपके bank account में आता तो आप की बचत हो जाती और आप इसका इस्तमाल किसी भी जरुरी काम के लिए कर पाते |

Gift Card से खरीदारी-
आज कल यह आम चलन हो गया है कि companies अपने employees को Diwali पर Gift Card दे देती है ताकि employee अपनी इच्छानुसार सामान खरीद सके | वास्तव में Gift card कार्ड एक समझदारी भरा उपहार होता है | कुछ कम्पनियां gift card से खरीदारी करने पर 15 प्रतिशत तक की छूट की पेशकश करती है | ऐसे में हो सकता है कि 5000 रुपए तक का सामान आपको 4,250 रुपए में मिल जाएगा | लेकिन gift card कुछ निश्चित समय तक की तय अवधि के लिए आते है | इस अवधि में खरीदारी नहीं करने पर राशि वापस पाने का विकल्प नहीं होता है | 
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पहली बार shopping पर ही discount या cashback

                                                                
E-commerce company जैसे Groffer, Big Basket , Croma आदि भी festival season में विशेष छूट (upto 30% प्रतिशत ) की पेशकश करती है | लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह छूट ज्यादातर पहली बार खरीदारी करने वालो के लिए ही होती है | कभी – कभी ये केवल चुनिन्दा उत्पादों पर ही छूट देती है लेकिन इस बात का जिक्र विज्ञापनों में नहीं होता है | ऐसे में इस बात पर जरुर गौर करें कि छूट उन सभी उत्पादों पर हो जिसके लाभ के लिए आपने खरीदारी की है और पहली बार खरीदारी करने जैसी शर्त न हो |
Delivery Charges
किसी भी product की खरीदारी करते समय delivery charges अवश्य देख ले क्योंकि ऐसा न हो आप 1200 रुपए की shopping कर रहे है और उस पर 300 रुपए का delivery charges दे दे रहे है | ऐसे में उसका price 1500 रुपए हो जाएगा जबकि हो सकता है आप को वह सामान market में 1400 रुपए में ही मिल जाए |
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Price की तुलना (comparison)
खरीदारी करने से पहले आप जिस product को खरीदना चाहते है उसके price की तुलना दूसरे e-commerce companies के sites पर जाकर जरुर कर लें क्योंकि सबके offer एक समान नहीं होते है | Product के साथ – साथ आप उनके feature की भी तुलना कर ले तभी खरीदारी करें |
अंत में मैं आप से यही कहना चाहती हूँ कि cashback या फिर लुभावने offer के लालच में पड़कर अपनी जेब को हल्का न करें बल्कि पूरी पड़ताल करने के बाद ही खरीदारी का फैसला करना आपके लिए फायदेमंद होगा | आखिर अपनी मेहनत की कमाई का सही इस्तेमाल किसे नहीं अच्छा लगता |

શ્રી શંકરાચાર્ય પાસેથી યુવાનોએ શું શીખવાનું છે? – હિમા યાજ્ઞિક

(‘જનકલ્યાણ’ સામયિકમાંથી સાભાર)

મહાપુરુષોના ચરિત્રોથી પ્રજાવર્ગ ઉપર નીપજતી અસરના સંબંધમાં પ્રખ્યાત અંગ્રેજ ગ્રંથકાર સ્માઈલ્સે પોતાના ‘કેરેક્ટર’ નામના સુપ્રસિદ્ધ ગ્રંથમાં લખ્યું છે કે ‘એક મહાપુરુષ મરી જાય છે અને અદ્રશ્ય થાય છે, પણ તેના વિચારો અને કાર્યો પાછળ હયાત રહે છે, અને પોતાની જાતિ ઉપર અને દેશ ઉપર ન ભૂંસાય તેવી છાપ પડી જાય છે. તેમના ચૈતન્યનો પ્રકાશ ભવિષ્યના સઘળા જમાનાઓ ઉપર પડતો રહે છે. તેમનું દ્રષ્ટાંત તેમની પરંપરાને સર્વ સામાન્ય વારસો છે. તેમના વિચારો, તેમના મહાન કાર્યો મનુષ્યજાતિને મળતી સર્વોત્કૃષ્ટ પૂંજી છે.’

કેવા પુરુષનું ચરિત્ર લખાવું જોઈએ ? કવિ ટોમ્સન કહે છે, ‘જેણે જનસમાજના કલ્યાણ અને ઉન્નતિ માટે તન, મન, ધનનો સર્વથા ભોગ આપી માત્ર વિશુદ્ધ કર્તવ્યબુદ્ધિથી જ કરેલાં અનેક પરોપકારી કૃત્યો વડે પોતાનું નામ અમર કરી મૂક્યું હોય, જેમને તેમના સમયની સમગ્ર પ્રજાએ પોતાના નેતા અને શુભચિંતક માન્યા હોય, અને પ્રસંગોપાત જેના શુભ નામ યશનું પૂજ્યભાવપૂર્વક ગાન થતું હોય.’

શ્રી શંકરાચાર્ય જ્યારે પ્રગટ થયા ત્યારે દેશમાં અશાંતિ હતી, લોકો દુઃખી હતા. સનાતન ધર્મનો વિનાશ થઈ રહ્યો હતો. શ્રી શંકરાચાર્ય પોતાના અદ્‍ભુત અદ્વૈત દર્શન દ્વારા સમગ્ર દેશને પરિપ્લાવિત કરીને ધર્મમાં યુગાન્તરકારી સુધારણા લાવ્યા. બ્રહ્મસૂત્ર, અગિયાર મુખ્ય ઉપનિષદો અને ભગવદ્‍ ગીતા ઉપર ભાષ્ય લખીને અમર બન્યા. વિવેકચૂડામણિ, અપરોક્ષાનુભૂતિ વિ. ગ્રંથો દ્વારા એમના અગાધ જ્ઞાન અને અપરિમિત કલ્પનાશક્તિનું પ્રમાણ મળે છે. એમણે રચેલાં અદ્વિતીય સ્તોત્રો ભક્તિ અને વૈરાગ્યભાવનાથી એટલાં બધાં પરિપૂર્ણ છે કે એનાથી પાષાણહૃદયી માનવ પણ દ્રવી ઊઠે.

સ્વામી વિવેકાનંદે યુવાનોને ખાસ ઉદ્દેશીને ઉપદેશો, સંદેશાઓ, વ્યાખ્યાનો આપેલા છે. પરંતુ શ્રી શંકરાચાર્યે માત્ર યુવાનોને જ દીવાદાંડીરૂપ થાય તેવું કોઈ અલગ માર્ગદર્શન આપેલું નથી. માટે, યુવાનોએ પોતાના બહુલક્ષી ઉત્કર્ષ માટે તેમના જીવનદર્શન દ્વારા જ પ્રેરણા મેળવવી પડે.

જગદ્‍ગુરુ આદિ શંકરાચાર્ય મહારાજે તેમના પ્રસિદ્ધ ગ્રંથ ‘વિવેક ચૂડામણિ’માં ત્રણ વસ્તુઓને પરમ ગણાવી છે : ૧. મનુષ્ય દેહ, ૨. સત્સંગ, ૩. મોક્ષ.
મનુષ્ય દેહને સાર્થક કરવા ત્રણ વાનાં ખાસ કરવાનાં કહે છે,
૧. શ્રીમદ્‍ ભગવદ્‍ગીતા અને વિષ્ણુસહસ્રનામનો હંમેશાં પાઠ કરવો.
૨. શ્રીપતિ એટલે વિષ્ણુના સ્વરૂપનું હંમેશાં ધ્યાન કરવું.
૩. દીન-દુઃખીયાને અન્ન, દ્રવ્ય વિ.થી મદદરૂપ થવું.
દેહ મળ્યો છે તો સાથે ગુણ-અવગુણ પણ આવવાનાં જ. તેમનાં ચરિત્રમાંથી આપણે ઉન્નતિ સાધી શકીએ.

દેહની ક્ષણભંગુરતા :
યુવાવર્ગ આજે ભૌતિકતા તરફ ઢળતો જાય છે તેવી ચારે કોરથી આલોચના થઈ રહી છે. કપડાં-વાળની ટાપટીપ, શરીરે વિવિધ ટેટૂમાર્ક, સુગંધી દ્રવ્યોના અતિરેક, વિષયલોલુપતા, ધન પાછળ આંધળી દોડ, વિ. યુવાવર્ગ માટે સહજ સામાન્ય બન્યાં છે. ત્યારે શ્રી શંકરાચાર્યનું ‘ચર્પટપંજરિકા’ સ્તોત્ર મમળાવવા જેવું છે. તેમની વાણી કેવી પ્રાસાદિક છે ! એમાં કેવું માધુર્ય, લાલિત્ય અને સૌંદર્ય છે ! ‘ભજ ગોવિન્દમ્‍’ની કડીઓ લલકારવી ગમે તેવી છે. ‘શરીર ગળી ગયું, માથાના કેશ ધોળા થઈ ગયા, મોઢું બોખું થઈ ગયું અને ડોસો લાકડીના ટેકે ચાલે છે, તોય એ આશાના પિંડને છોડતો નથી. રાત પછી દિવસ, પછી પખવાડિયું, પછી માસ, પછી ઉત્તરાયણ, દક્ષિણાયન અને પછી વર્ષ ફરી ફરી આવે જ જાય છે, તોયે માણસ આશાની અશાંતિને છોડતો નથી. ભજ ગોવિંદમ્‍ ભજ ગોવિંદમ્‍ ભજ ગોવિંદમ્‍ મૂઢમતે !’

અહંકારશૂન્યતા અને આત્માનુભૂતિ :
યુવાવર્ગ અશાંતિના અગ્નિમાં શેકાઈ રહ્યો છે તેવું પણ કેટલાક કહે છે. શેની અશાંતિ ? શેનો અસંતોષ ? ક્યાંક કશીક અપર્યપ્તતાની ઝંખનાની પીડા છે. સેક્સ, ધનપ્રાપ્તિ, પદ પ્રતિષ્ઠા દ્વારા પર્યાપ્ત થવાની ઝંખના છે, પણ તે ભોગવ્યા પછીથી પણ તૃપ્તિ નથી થતી. ઊલટાનું એ આપણને ગુલામીનો, પામરતાનો, લાચારીનો અને બિનસલામતીનો અનુભવ કરાવે છે. એમાંથી જન્મે છે મુક્ત થવાની, સ્વસ્થ થવાની, અમર થવાની અને પૂર્ણતા પ્રાપ્ત કરવાની ઝંખના. આ ઝંખનાનું અનોખું કાવ્ય તે શ્રી શંકરાચાર્યનું ‘નિર્વાણશટકમ્‍’ સ્તોત્ર. એમાં પંચમહાભૂતમાંથી બનેલા શરીર, મન, બુદ્ધિ, અહંકાર અને ચિત્તથી પર એવા નિરાકાર, નિર્વિકલ્પ આનંદસ્વરૂપ આત્મતત્વનો મહિમા છે. યુવાનો ‘ચિદાનંદરૂપઃ શિવોહમ્‍ શિવોહમ્‍’ મમળાવશે તો અહંકાર નષ્ટ થઈ સાચી શૂન્યતાનો અનુભવ થવામાં મદદરૂપ થશે.

નિરભિમાનીપણું :
શાક્તો, પાશુપાતો, જૈનો, કાપાલિકો, વૈષ્ણવો અને એવા જ બીજા હઠાગ્રહી ધર્માંધોએ ઉચ્છિન્ન કરી નાખેલા વેદમાર્ગનું રક્ષણ કરવા માટે જ શ્રી શંકરાચાર્યે ઉગ્રવાદીઓને હરાવ્યા હતા, પોતાનું માન વધારવા નહીં. કારણ કે સર્વજ્ઞ શ્રી શંકરાચાર્યને માનની આકાંક્ષારૂપ ભૂત વળગ્યું નહોતું.

નમ્રતા :
શ્રી શંકરાચાર્યે સાંખ્ય, ન્યાય વૈશેષિક, બૌદ્ધ, જૈન, ભાગવત વિ.ના ભૂલભરેલા સિદ્ધાંતોનું ઘણી સમર્થ રીતે ખંડન કર્યું છે. અનેક પ્રકારની દલીલો વડે, શાસ્ત્રનાં વિવિધ પ્રમાણો વડે, મર્યાદાપૂર્વક, અન્ય મતાનુયાયીઓના ખોટા મતનું ખોટાપણું સિદ્ધ કરી આપ્યું છે. વિરુદ્ધમત ધરાવનારા વિદ્વાનો તરફ ઉદારતા જ બતાવી છે, કેમ કે ગાળાગાળી કરીને નહિ, પણ શાસ્ત્ર અને તર્કનો આધાર રાખીને તેઓને નિરુત્તર બનાવ્યા છે. શ્રી શંકરાચાર્યની વાણી અતિ સરળ, સુંદર, સાદી અને તેથી જ વિશેષ જુસ્સાદાર અને મીઠાશવાળી લાગે છે. આપણે આ આવકારીશું ને ?

ખેલદિલી :
શ્રી શંકરાચાર્ય અને મંડનમિશ્ર વચ્ચે થયેલા શાસ્ત્રાર્થની આ વાત છે. મંડનમિશ્ર પ્રખર કર્મકાંડી હતા. તેઓ સંન્યાસને ધિક્કારતા હતા. તેમને ખાત્રી હતી કે વાદમાં હું જ જીતવાનો છું. તેથી તેમણે કહ્યું, ‘જે હારે તે જીતનારનો ચેલો બને.’ શ્રી શંકરાચાર્યે શરત કબૂલ કરી, પણ કોણ હાર્યું, કોણ જીત્યું તેનો નિર્ણય કોણ કરે ? મંડનમિશ્રની પત્ની ભારતી વિદુષી હતાં. શ્રી શંકરાચાર્યે તેમને જ આ ચર્ચાનું અધ્યક્ષસ્થાન આપ્યું અને નિર્ણાયક બનાવ્યાં. ચર્ચાને અંતે તેણે પોતાનો ચુકાદો શ્રી શંકરાચાર્યની તરફેણમાં આપ્યો. બંને જણે શ્રી શંકરાચાર્યનું શિષ્યત્વ સ્વીકાર્યું.

બંને પક્ષે કેટલી બધી ખેલદિલી ? શરૂઆતમાં તો ભારતીએ મધ્યસ્થ થવા ના પાડેલી, કારણ કે એક પક્ષે પતિ હતા. વળી, કદી વાદમાં પતિનો જય થાય અને યોગ્ય સમજી પોતે તેમ જણાવે તો લોકો તરફથી પોતાને પક્ષપાતનો દોષ લાગે; જો શ્રી શંકરાચાર્યનો જય થયો તેવું જાહેર કરે તો પોતાને પતિદ્રોહનું કલંક લાગે. આ બાજુ શ્રી શંકરાચાર્યને પણ ભારતીની તટસ્થતાની કેવી પૂર્ણ શ્રદ્ધા હશે ? પ્રતિસ્પર્ધીની પત્નીને જ નિર્ણાયક રાખ્યાં !
આવી ખેલદિલી આપણે જીવનમાં કેળવી શકીએ !

તીર્થયાત્રા :
શ્રી શંકરાચાર્ય વેદાંતનો સંદેશો જગતને સંભળાવવા તીર્થયાત્રાએ નીકળ્યા. તેમના જેવા જ્ઞાનનિષ્ઠ આચાર્ય કેટલા હજાર કિલોમીટર ચાલ્યા તેનો વિચાર કરવા જેવો છે. જ્યારે સડકો નહોતી અને સાધનો નહોતાં ત્યારે તેમણે કાશ્મીરથી કન્યાકુમારી અને જગન્નાથપુરીથી દ્વારકા સુધીના વિસ્તારોની ત્રણ વાર પદયાત્રા કરી. આ આધ્યાત્મિક દિગ્વિજય દ્વારા તેમણે ધર્મમાં નવો પ્રાણ પૂર્યો અને તેમાં ઘૂસી ગયેલાં દૂષણો દૂર કર્યાં.

આજે તો ઘેર ઘેર ઈન્ટરનેટ ઉપલબ્ધ છે. તીર્થાટનની પળોજણમાં પડ્યા વિના જ ઈન્ટરનેટના માધ્યમથી જ્ઞાન, ભક્તિ અને કર્મનો સમન્વય સાધી જીવનપદ્ધતિ અને જીવનદ્રષ્ટિમાં આપણે ઉચિત ફેરફાર લાવી શકીએ.

માતૃભક્તિ :
એક શ્રી શંકરાચાર્ય જ એવા છે જેણે સંન્યાસ લીધા પછી પણ માની સેવા કરી છે. (જોકે મહાભારતમાં ઉલ્લેખ છે કે મહર્ષિ વેદવ્યાસે માતા સત્યવતીને વચન આપેલું કે જ્યારે પણ યાદ કરશો ત્યારે હું આવી પહોંચીશ.) માનું ઋણ જ્ઞાની હોય, ભગવદ્‍ભક્ત હોય, સાધુ હોય- બધા ઉપર છે. છોકરો ભગવદ્‍ભક્ત હોય તો પિતા પુત્રને વંદન કરે છે. પણ જ્ઞાની સંતો માને વંદન કરે છે. માના અનંત ઉપકારો આ શરીર ઉપર છે એ સંતો યાદ રાખે છે. શ્રી શંકરાચાર્ય જ્ઞાની છતાં માની સેવા કરવાનું ભૂલતા નથી. સંન્યાસ લીધા પછી, જગદ્‍ગુરુ થયા પછી પણ, શ્રી શંકરાચાર્ય માને ગુરુ માની સેવા કરે છે.

શ્રી શંકરાચાર્ય તત્વજ્ઞાની હોવાની સાથે મહાયોગી હતા. એક દિવસ દિવ્યદ્રષ્ટિથી એમને ખબર પડી કે એમનાં માતા મૃત્યુશૈયા પર છે. એટલે માતાને આપેલા વચન પ્રમાણે તેઓ તરત જ કાલડી પહોંચી ગયા.

માતાની આખરી ઈચ્છા સંતોષવા શ્રી શંકરાચાર્યે આઠ કડીનું ‘કૃષ્ણાટક’ રચી માતાને સંભળાવ્યું. પહેલી કડી પ્રમાણે, ‘શંખ, ચક્ર, ગદા અને વિમલ વનમાળા જેણે ધારણ કર્યાં છે એવા સ્થિર કાંતિવાળા, લોકેશ્વર કૃષ્ણ મારી આંખો સામે પ્રગટ થાઓ !’ માતાના મનમાં કૃષ્ણની છબી રમી રહી. માતાની પ્રસન્નતાનો પાર ન રહ્યો. જેમ સ્તોત્ર બોલાતું ગયું તેમ કૃષ્ણનું સ્વરૂપ વધારે ને વધારે પ્રત્યક્ષ થતું ગયું. ભગવાનના પ્રત્યક્ષ દર્શન કરતાં માતાએ દેહ છોડ્યો.

આમ, શ્રી શંકરાચાર્યને માતા પ્રત્યે અપૂર્વ ભક્તિ હતી. તેથી જ તેઓ કહે છે, ‘તેં પ્રસુતિ સમયે અસહ્ય વેદના ભોગવી તે ધ્યાનમાં ન લઉં, જન્મ્યા પછી એક વર્ષ સુધી મળ-મૂત્રવાળી શૈયા પર તે તારું શરીર સૂકવી નાખ્યું એ વાત પણ લક્ષ્યમાં ન લઉં, પણ જન્મ પહેલાં તેં મારા સ્થૂળ દેહનો ભાર વહન કરીને જે કષ્ટ વેઠ્યું, એ તારા એટલા ઉપકારનો બદલો વાળવા હું બ્રહ્મવિદ્‍ થયો હોવા છતાં સમર્થ નથી. આવી માતાને નમસ્કાર હો !’

પોતાના ભાષ્યમાં માતાની વ્યાખ્યા આપતાં કહ્યું છે : ‘પુત્ર પર સમ્યક્‍ અનુશાસન કરે તે માતા. એટલે કે માતા જ પુત્રની શ્રેષ્ઠ ગુરુ છે.’

શ્રી શંકરાચાર્ય આ પ્રમાણે આપણને માતાપિતા પ્રત્યેનું ઋણ-ફરજ અદા કરવાનું શિખવે છે.

રૂઢિબંધનોથી પર :
શ્રી શંકરાચાર્ય રૂઢિ કે નિયમને વળગી રહેનારા નહોતા. સંન્યાસી થઈને શ્રી શંકરાચાર્ય માતાના દેહનો અગ્નિસંસ્કાર કરે એ ન્યાતીલાઓને ગમ્યું નહિ. તેથી કોઈ જ તેમને મદદ કરવા આવ્યું નહિ. શ્રી શંકરાચાર્યે એકલાએ ઘર આગળ જ માતાની ચિતા રચી; પછી પોતાની યોગશક્તિથી અગ્નિ પ્રગટાવી માતાને અગ્નિદાહ દીધો.
આપણે પણ રૂઢિચુસ્તતા છોડીએ તો કેવું ?

સત્સંગ :
શ્રી શંકરાચાર્ય કહેતા ‘સાધુ પુરુષોનો સંગ કરવામાં જ ચિત્તને પ્રેરવું.’ આજકાલ લોકોમાં સત્સંગ વિશે બહુ સંકુચિત ખ્યાલ પ્રવર્તે છે. તેમના મતે સત્સંગ એટલે કથાઓમાં જવું, સાધુસંતોની સોબતમાં રહી તેમની સેવા કરવી, તેમના પ્રવચનો સાંભળવા, ભજન કીર્તન કરવા, ભાગવત સપ્તાહ કે રામકથામાં હાજરી આપવી વિ. પરંતુ, સત્સંગ આથી વિશેષ છે. સત્સંગ એટલે સત્યનો સંગ-શુભનો સંગ. હંમેશાં સત્યની પડખે જ ઊભા રહેવું, ગમે તેટલું ભૌતિક નુકસાન થતું હોય તો પણ સત્યનો સાથ ન છોડવો, સન્માર્ગે ચાલવું. સત્સંગ નાત, જાત અને ધર્મના ભેદ અને બંધનથી પર છે.

સત્સંગ કરતાં કરતાં અસંગ માટે મથવાનું છે, કુસંગથી બચવાનું છે. અસંગ એ અધ્યાત્મમાર્ગની સૌથી ઊંચી અવસ્થા છે.

આ ઘોર કળિયુગમાં જ્યારે ચારે તરફ નૈતિક મૂલ્યોનો હ્રાસ થતો જોવા મળે છે ત્યારે ફક્ત સત્સંગ જ આપણને બચાવશે, તારશે. શ્રી શંકરાચાર્યનો આ સંદેશ આપણે જીવનમાં ઉતારવા જેવો છે.

જ્ઞાની શ્રી શંકરાચાર્ય :
એક અડધા શ્લોકમાં તેમણે પોતાની વાત કહી દીધી છે : ‘બ્રહ્મ સત્યમ્‍ જગત્‍ મિથ્યા, જીવો બ્રહ્મૈવ નાપરમ્‍’. એટલે કે બ્રહ્મ સત્ય છે, જગત મિથ્યા છે; જીવ બ્રહ્મ જ છે, બીજું કશું નથી.

આજનો યુવાવર્ગ આવી અઘરી ફિલસૂફી સમજી શકે તે માટે સાદું, સરળ દ્રષ્ટાંત સ્વ.પૂ.ડોંગરે મહારાજ આપે છે.

‘સિનેમાના પડદા ઉપર અનેક ચિત્રો દેખાય છે. ક્યારેક પડદા ઉપર વર્ષા થાય છે, ક્યારેક અગ્નિજ્વાળાનું દ્રશ્ય આવે છે. વર્ષા છતાં પડદાનો ધાગો પણ ભીંજાતો નથી. અગ્નિજ્વાળા છતાં પડદાને કંઈ થતું નથી. સંસાર પણ એક ચિત્ર છે. સંસાર ચિત્ર-વિચિત્ર છે. બ્રહ્મતત્વ એક સત્ય છે.’

મનુષ્યનું કર્તવ્ય :
શિષ્યોની જિજ્ઞાસાના જવાબમાં શ્રી શંકરાચાર્ય કહે છે : ‘હું કોણ છું ?’, ‘આ સંસારમાં ક્યાંથી આવ્યો છું ?’ અને ‘મારે શું કરવું જોઈએ ?’ આ વિચાર મનુષ્યે નિરંતર કરવો જોઈએ. સુખદુઃખમાં સમતા જાળવવી, ધર્મનું રક્ષણ કરવું, તમોભાવ ન રાખવો, શાસ્ત્રવચનોમાં વિશ્વાસ રાખવો, મનમાં કપટભાવ ન રાખવો, કહેવું કંઈ અને કરવું કંઈ એવી દાંભિકવૃત્તિ ન રાખવી, સત્પુરુષોના સમાગમમાં, સત્‍શાસ્ત્રના શ્રવણ મનનમાં અને સદ્‍વિચારમાં જ સમય ગાળવો. સત્ય, ક્ષમા, દયા, સંતોષાદિ સદ્‍ગુણોનું સેવન કરવું. વિવેક વૈરાગ્યની સાથે પરમ મિત્રતા રાખવી અને નિરંતર આત્મચિંતન કરવું. જેથી સચ્ચિદાનંદરૂપ પરબ્રહ્મ પરમાત્માની સહજમાં પ્રાપ્તિ થશે.’

આ જ શિખામણ તદ્દન સંક્ષેપમાં એક શ્લોકમાં તેમણે આવરી લીધી છે. આપણે સૌએ તેનું મનન કરવા જેવું છે.

‘સાચો ગુરુ કોણ ? જે હિતનો ઉપદેશ આપે.
શિષ્ય કોણ ? જે ગુરુનો અનન્ય ભક્ત હોય.
મહારોગ કયો ? પુનર્જન્મ એ મહારોગ.
અને તેનું ઓસડ શું ? ‘તે’નું (પરમાત્માનું) ચિંતન કરવું તે.’

આવા શ્રી શંકરાચાર્ય આઠમા વર્ષે ચાર વેદના જાણનાર થયા, બારમા વર્ષમાં સર્વ શાસ્ત્રવેત્તા થયા, સોળમે વર્ષે દિગ્વિજય કરનારા અને બત્રીસમા વર્ષે સ્વધામમાં પધાર્યા !

દરેકની જીવનયાત્રામાં એક ‘શ્રી શંકરાચાર્ય’ રૂપી પીઠબળ આવે છે. અણઘડ શિખાઉ તરુણમાંથી મહાત્મા બનવાની દિશાનો પ્રવાસ અહીંથી જ શરૂ થાય છે.

જેમણે ઉત્તર ભારતમાં આવેલા બદરિનાથ તેમ જ પોતાની શક્તિપીઠમાં છેક દક્ષિણ ભારતના નામ્બુદ્રિપાદ બ્રાહ્મણોને જ પૂજનવિધિ કરવાનો અધિકાર આપીને ભારતવર્ષની ઐક્યતા સિદ્ધ કરી છે તેવા જગદ્‍ગુરુને કોટિ વંદન.

– હિમા યાજ્ઞિક

सपने देखने का साहस तो करें!

​नेपोलियन हिल के अनुसार
धरती की समृद्धियों और सारी उपलब्धियों का मूल विचार सपना है।

सपने देखने का साहस तो करें!
AUGUST 29, 2016 BY GOPAL MISHRA 9 COMMENTS
सपना क्या है ?

 

नेपोलियन हिल के अनुसार
धरती की समृद्धियों और सारी उपलब्धियों का मूल विचार सपना है।
आमतौर पर आप उन सपनों की बात करते हैं जो सोते हुए देखे गए होते है, लेकिन उन सपनों के बारे में कभी नहीं सोचते जो जागते हुए देखे जाते हैं। यह सपना भारत का प्रधानमंत्री बनने का भी हो सकता है और किसी स्कूल का टीचर बनके ज्ञान बाटने का भी। सपने मन की तस्वीर होते है जो हर सही व्यक्ति को वास्तव में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते है चाहे वह शाहजहां की तरह ताजमहल बनाने का सपना हो या पढाई में उच्चतम स्थान पाने का। सपनों में हमें ऊपर उठाने की ऐसी असीमित शक्ति होती है जो हमें प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आगे बढने की प्रेरणा देती है।
प्रसिद्ध विचारक रूजवेल्ट ने भी कहा था कि
जो अपने सपनों की सुन्दरता में विश्वास रखते है, आने वाला समय उन्हीं का है।
डॉ. कलाम ने कहा था

इससे पहले कि सपने सच हों आपको सपने देखने होंगे।।
आपके सपने आपके अपने होते है और आप के द्वारा ही देखे गए होते है। एक बार आप सपने देखने का साहस तो करें। वो कहते है न कि सबसे गरीब व्यक्ति वह नहीं है, जिसके पास धन – दौलत नहीं है बल्कि सबसे गरीब वह व्यक्ति है जिसके पास कोई सपना नहीं है। आज मैं आप से जीवन में सपनों की क्या अहमियत होती है, उसके बारे में बाते करूंगी।
सपना और कल्पना में अंतर
सपना और कल्पना में कभी – कभी अंतर करना मुश्किल हो जाता है। सपने की सबसे बड़ी परिभाषा यह है कि सपने आपकी सर्वश्रेष्ठ उपलब्धियों का छायाचित्र होता है। दूसरे शब्दों में कहे तो जब आप सपना देखते है और अपने जीवन में जिस जगह भी जाना चाहते है उसका आपके मन में मानसिक चित्र बनाने के लिए आपकी भावनाएं आपको कल्पना शक्ति देती है। कल्पना और सपने में बस यही अंतर है कि सपने साकार किये जाते है चाहे वह सपना हवाई जहाज उड़ाने का हो या फिर मंगल ग्रह पर पहुँच कर घर बनाने का। सपना देखते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए कि वह प्राप्त करने योग्य हो, अन्यथा वे कल्पना मात्र ही रह जायेंगे।
सपनों से समझौता क्यों?
जिम कैरी जो कि एक हास्य कलाकार थे, उन्होंने अपने कैरियर के मंदी के दौरान धनी व famous बनने का सपना देखा था। उन्होंने अपने सपनो को लिख लिया था और उसे पूरा भी किया। 1995 में उन्होंने 10 मिलियन डॉलर का एक चेक लिखकर अपने पास संभालकर कर रख लिया और प्रबल इच्छाशक्ति व साहस के साथ अपने सपनों को पूरा करने में जुट गये। आश्चर्य की बात तो तब हुई जब number 1995 में
जिम कैरी को मास्क – 2 में काम करने के लिए 20 मिलियन डालर का सुअवसर मिला। यह तभी संभव हुआ जब उन्होंने अपने सपनों के साथ कोई समझौता नहीं किया। इसलिए अपने सपनों को मरने मत दें और न ही उनके साथ कोई समझौता करें बल्कि उन्हें जिंदा रखें और हर रोज अपने सपनों के बारे में सोचे।

सपनों का क्रियान्वयन आप के द्वारा ही होता है इसलिए सपनों को हकीकत में बदलने के लिए आपको तीन महत्वपूर्ण चरणों से होकर गुजरना होगा।
1- अपने सपनों के बारे में सोचना 
आप के सपने आपके अपने होते है। इनके साथ किसी भी तरह का समझौता करना समझदारी का काम नहीं है। यदि आपका कोई सपना है जिसे आप अपने जीवन में पाना चाहते है तो सबसे पहले उन सपनों को लिख लीजिए, अगर सपना एक से अधिक है तो उनका एक लिस्ट बना लीजिए साथ ही अपने आप से प्रश्न भी करते रहना चाहिए। इससे आपकी कल्पना को पुन: प्रेरणा मिलेगी जैसे अपने आप से पूछिए यदि मुझे दुनिया में कोई नौकरी मिल सके तो वह किस तरह की होगी ? ऐसे प्रश्नों का उत्तर आप के सपनों को पहले से ज्यादा गति एवं मजबूती प्रदान करेगा।
2- सपने स्पष्ट रूप से देखना 
जब आप सपने देखते है तब अपनी इच्छा के अनुसार एक अस्पष्ट विचार से शुरुआत करते है और उसके बाद अपने ध्यान को तब तक केन्द्रित रखते है जब तक दिमाग में सही व स्पष्ट चित्र नहीं बन जाता है।
वास्तव में इस प्रक्रिया के द्वारा आप सपनों को साकार करने का काम करते है। सपनों को सजीव व स्पष्ट रूप से देखना ही विजन है। जब आप अपनी अलग राह चुनते है तो मंजिल तक पहुचने के लिए आपका vision एकदम स्पष्ट होना चाहिए। सपने देखने से हमें न तो कोई हतोत्साहित कर सकता है और न ही आपसे इसको कोई चुरा सकता है। यदि सपना धुंधला है तो विजन बिल्कुल स्पष्ट होना ही चाहिए। जब हमारे पास विजन होता है तभी आप अपनी मनचाही जगह देख पाते है, उसके आस – पास घूमते है और अंत में अपने सपने को स्पष्ट रूप से देख पाते है।
3- अपने सपनों को योजनाबद्ध करना
योजना को चरणबद्ध करना ही प्रतिभागियों को दर्शको से या फिर driver को यात्रियों से अलग करता है। जब आप अपने सपनों के बारे में योजना बनाना प्रारम्भ करते है तो लगता है कि आप अपने सपनों के प्रति गंभीर रहते है। योजना बनाने का मतलब है कि आप केवल बात करने के बजाय उसको पूरा करने के लिए दृढ़ है। जैसे आप अपना कोई नया बिजनेस या पढाई – लिखाई करने के लिए किसी बैंक से कर्ज लेना चाहते है तो बैंक भी सबसे पहले यही प्रश्न पूछेगा कि ‘आपकी भावी योजनाएं क्या हैं ?’ इसलिए अपने सपनों को योजनाबद्ध करना जरुरी है।
इन बातों का रखे खास ख्याल – उपर्युक्त के अतिरिक्त आप को निम्न बातों का भी ख्याल रखना होगा।

व्यक्तिगत लक्ष्य को लिखें। (पढ़ें: जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है?)

अपने सपने के बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करें।

सपने देखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।

सपनों को पूरा करने के लिए विजन में बदलने का प्रयास करें।

अपने सपनों को योजनाबद्ध करें।

प्रतिदिन के काम करने की सूची बनाएं। ( पढ़ें : कैसे बनाएं To Do List)

और सबसे महत्वपूर्ण बात कि अपने आप में सपने देखने का साहस पैदा करें।

सपनों को साकार करने में इन महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखते हुए कार्य को अंजाम दिया जा सकता है
और इस तरह से एक सफल जीवन को जिया जा सकता है।

Source- achchikhabar.com

जीवन में लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है? Importance of Goals in Hindi

लक्ष्य या Goals  होते क्या हैं?

लक्ष्य एक ऐसा कार्य है जिसे हम सिद्ध करने की मंशा रखते हैं.  Goal is a task which we intend to accomplish.

कुछ examples लेते हैं: एक  student का लक्ष्य हो सकता है: ” Final Exams  में 80% से ज्यादा marks लाना.” एक employee का लक्ष्य हो सकता है अपनी performance  के basis पे promotion पाना. एक house-wife का लक्ष्य हो सकता है :” Home basedbusiness की शुरुआत करना. एक blogger का लक्ष्य हो सकता है:” अपने ब्लॉग की page rank शुन्य से तीन तक ले जाना” एक समाजसेवी का लक्ष्य हो सकता है:” किसी गाँव के सभी लोगों को साक्षर बनाना”

लक्ष्य का होना ज़रूरी क्यों है? / Importance of Goals in Hindi

१) सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए: जब आप सुबह घर से निकलते हैं तो आपको पता होता है कि आपको कहाँ जाना है और आप वहां पहुँचते हैं, सोचिये अगर आपको यह नहीं पता हो कि आप को कहाँ जाना है तो भला आप क्या करेंगे? इधर उधर भटकने में ही समय व्यर्थ हो जायेगा. इसी तरह इस जीवन में भी यदि आपने अपने लिए लक्ष्य नहीं बनाये हैं तो आपकी ज़िन्दगी तो चलती रहेगी पर जब  बाद में आप पीछे मुड़ कर देखेंगे तो शायद आपको पछतावा हो कि आपने कुछ खास achieve  नहीं किया!!

लक्ष्य व्यक्ति को एक सही दिशा देता है. उसे बताता है कि कौन सा काम उसके लिए जरूरी है और कौन सा नहीं.  यदि goals clear हों तो हम उसके मुताबिक अपने आप को तैयार करते हैं. हमारा subconscious mind हमें उसी के अनुसार act करने के लिए प्रेरित करता है. दिमाग में लक्ष्य साफ़ हो तो उसे पाने के रास्ते भी साफ़ नज़र आने लगते हैं और इंसान उसी दिशा में अपने कदम बढा देता है.

२) अपनी उर्जा का सही उपयोग करने के लिए:भागवान ने इन्सान को सीमित उर्जा और सीमित समय दिया है. इसलिए ज़रूरी हो जाता है कि हम इसका उपयोग सही तरीके से करें. लक्ष्य हमें ठीक यही करने को प्रेरित करता है. अगर आप अपने end-goal को ध्यान में रख कर कोई काम करते हैं तो उसमे आपका concentration और energy का  level कहीं अच्छा होता है.

For Example: जब आप किसी  library में बिना किसी खास किताब को पढने  के मकसद से जाते हैं तो आप यूँ ही कुछ किताबों को उठाते हैं और उनके पन्ने पलटते हैं और कुछ एक पन्ने पढ़ डालते हैं, पर वहीँ अगर आप कसी Project Report को पूरा करने के मकसद से जाते हैं तो आप उसके मतलब की ही किताबें चुनते हैं और अपना काम पूरा करते हैं. दोनों ही cases में आप समय उतना ही देते हैं पर आपकी  efficiency में जमीन-आसमान का फर्क होता है. इसी तरह life  में भी अगर हमारे सामने कोई निश्चित लक्ष्य नहीं है तो हम यूँ ही अपनी energy  waste करते रहेंगे और नतीजा कुछ खास नहीं निकलेगा. लेकिन इसके विपरीत जब हम लक्ष्य को ध्यान में रखेंगे तो हमारी energy सही जगह उपयोग होगी और हमें सही results देखने को मिलेंगे.

३) सफल होने के लिए: जिससे पूछिए वही कहता है कि मैं एक सफल व्यक्ति बनना चाहता.पर अगर ये पूछिए कि क्या हो जाने पर वह खुद को सफल व्यक्ति मानेगा तो इसका उत्तर कम ही लोग पूर विश्वास से दे पाएंगे. सबके लिए सफलता के मायने अलग-अलग होते हैं. और यह मायने लक्ष्य द्वारा ही निर्धारित होते हैं. तो यदि आपका कोई लक्ष्य नहीं है तो आप एक बार को औरों कि नज़र में सफल हो सकते हैं पर खुद कि नज़र में आप कैसे decide  करेंगे कि आप सफल हैं या नहीं?  इसके लिए आपको अपने द्वारा ही तय किये हुए लक्ष्य को देखना होगा.

४) अपने मन के विरोधाभाष को दूर करने के लिए:  हमारी life में कई opportunities  आती-जाती रहती हैं. कोई चाह कर भी सभी की सभी opportunities का फायदा नहीं उठा सकता. हमें अवसरों को कभी हाँ तो कभी ना करना होता है. ऐसे में ऐसी  परिस्थितियां आना स्वाभाविक है जब हम decide  नहीं कर पाते कि हमें क्या  करना चाहिए. ऐसी situations में आपका लक्ष्य आपको guide कर सकता है. जैसे मेरा और मेरी wife  का लक्ष्य एक  Beauty Parlour खोलने का है, ऐसे में अगर आज उसे एक ही साथ दो job-offers मिलें, जिसमें से एक किसी पार्लर से हो तो वह बिना किसी confusion के उसे ज्वाइन कर लेगी, भले ही वहां उसे दुसरे offer के comparison  में कम salary मिले. वहीँ अगर सामने कोई लक्ष्य ना हो तो हम तमाम factors को evaluate करते रह जायें और अंत में  शायद ज्यादा वेतन ही deciding factor  बन जाये.

दोस्तों  अर्नोल्ड एच ग्लासगो का कथन,

फुटबाल कि तरह ज़िन्दगी में भी आप तब-तक आगे नहीं बढ़ सकते जब तक आपको अपने लक्ष्य का पता ना हो.

मुझे बिलकुल उपयुक्त लगता है. तो यदि आपने अभी तक अपने लिए कोई लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है तो इस दिशा में सोचना शुरू कीजिये. लक्ष्य बनाइये, बड़े लक्ष्य बनाइये, और उन्हें हासिल करके ही दम लीजिये !

All the best!

THOUGHT FOR THE DAY

THOUGHT FOR THE DAY

Cowards die many times before their deaths; the valiant never taste of death but once.
डरपोक अपनी मृत्यु से पहले कई बार मरते हैं; बहादुर मौत का स्वाद और कभी नहीं बस एक बार चखते हैं.
William Shakespeare विलियम शेक्सपीयर

5 चीजें जो आपको नहीं करनी चाहिए और क्यों ?

1) दूसरे  की  बुराई  को  enjoy करना

ये  तो  हम  बचपन  से  सुनते  आ  रहे  हैं  की  दुसरे  के  सामने  तीसरे  की  बुराई  नहीं  करनी  चाहिए , पर  एक और  बात  जो  मुझे  ज़रूरी  लगती  है  वो  ये  कि  यदि  कोई  किसी  और  की  बुराई  कर  रहा  है  तो  हमें  उसमे  interest नहीं  लेना  चाहिए  और  उसे  enjoy नहीं  करना  चाहिए . अगर  आप  उसमे  interest दिखाते  हैं  तो  आप  भी  कहीं  ना  कहीं  negativity को  अपनी  ओर  attract करते  हैं . बेहतर  तो  यही  होगा  की  आप  ऐसे  लोगों  से  दूर  रहे  पर  यदि  साथ  रहना  मजबूरी  हो  तो  आप  ऐसे  topics पर  deaf and dumb हो  जाएं  , सामने  वाला  खुद  बखुद  शांत  हो  जायेगा . For example यदि  कोई  किसी  का  मज़ाक  उड़ा रहा  हो  और  आप  उस पे  हँसे  ही  नहीं  तो  शायद  वो  अगली  बार  आपके  सामने  ऐसा  ना  करे . इस  बात  को  भी  समझिये  की  generally जो  लोग  आपके  सामने  औरों  का  मज़ाक  उड़ाते  हैं  वो  औरों  के  सामने  आपका  भी  मज़ाक  उड़ाते  होंगे . इसलिए  ऐसे  लोगों  को  discourage करना  ही  ठीक  है .

2) अपने  अन्दर  को  दूसरे  के  बाहर  से  compare करना

इसे  इंसानी  defect कह  लीजिये  या  कुछ  और  पर  सच  ये  है  की  बहुत  सारे  दुखों  का  कारण  हमारा  अपना  दुःख  ना  हो  के  दूसरे   की  ख़ुशी  होती  है . आप  इससे  ऊपर  उठने  की  कोशिश  करिए , इतना  याद  रखिये  की  किसी  व्यक्ति  की  असलियत  सिर्फ  उसे  ही  पता  होती  है , हम  लोगों  के  बाहरी यानि नकली रूप  को  देखते  हैं  और  उसे  अपने  अन्दर के यानि की असली  रूप  से  compare करते  हैं . इसलिए  हमें लगता  है  की  सामने  वाला  हमसे  ज्यादा  खुश  है , पर  हकीकत  ये  है  की  ऐसे  comparison का  कोई  मतलब  ही  नहीं  होता  है . आपको  सिर्फ  अपने  आप  को  improve करते  जाना  है और व्यर्थ की comparison नहीं करनी है.

3) किसी  काम  के  लिए  दूसरों  पर  depend करना

मैंने  कई  बार  देखा  है  की  लोग  अपने  ज़रूरी काम  भी  बस  इसलिए  पूरा  नहीं  कर  पाते क्योंकि  वो  किसी  और  पे  depend करते  हैं . किसी  व्यक्ति  विशेष  पर  depend मत  रहिये . आपका  goal; समय  सीमा  के  अन्दर  task का  complete करना  होना चाहिए  , अब  अगर  आपका  best  friend तत्काल  आपकी  मदद  नहीं  कर  पा  रहा  है  तो  आप  किसी  और  की  मदद  ले  सकते  हैं , या  संभव  हो  तो  आप  अकेले  भी  वो  काम  कर  सकते  हैं .

ऐसा  करने  से  आपका  confidence बढेगा , ऐसे  लोग  जो  छोटे  छोटे  कामों  को  करने  में  आत्मनिर्भर  होते  हैं  वही  आगे  चल  कर  बड़े -बड़े  challenges भी  पार  कर  लेते  हैं , तो  इस  चीज  को  अपनी  habit में  लाइए  : ये  ज़रूरी  है की  काम  पूरा  हो  ये  नहीं  की  किसी  व्यक्ति  विशेष  की  मदद  से  ही  पूरा  हो .

4) जो बीत गया  उस  पर  बार  बार  अफ़सोस  करना

अगर  आपके  साथ  past में  कुछ  ऐसा  हुआ  है  जो  आपको  दुखी  करता  है  तो  उसके  बारे  में  एक  बार  अफ़सोस  करिए…दो  बार  करिए….पर  तीसरी  बार  मत  करिए . उस  incident से जो सीख  ले  सकते  हैं  वो  लीजिये  और  आगे  का  देखिये . जो  लोग  अपना  रोना  दूसरों  के  सामने  बार-बार  रोते  हैं  उसके  साथ  लोग  sympathy दिखाने  की  बजाये उससे कटने  लगते  हैं . हर  किसी  की  अपनी  समस्याएं  हैं  और  कोई  भी  ऐसे  लोगों  को  नहीं  पसंद  करता  जो  life को  happy बनाने  की  जगह  sad बनाए . और  अगर  आप  ऐसा  करते  हैं  तो  किसी  और  से  ज्यादा  आप ही  का  नुकसान  होता  है . आप  past में  ही  फंसे  रह  जाते  हैं , और  ना  इस  पल  को  जी  पाते  हैं  और  ना  future के  लिए  खुद  को prepare कर  पाते  हैं ..

5) जो  नहीं  चाहते  हैं  उसपर  focus करना

सम्पूर्ण ब्रह्मांड में हम जिस चीज पर ध्यान केंद्रित करते हैं उस चीज में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है.  इसलिए   आप  जो  होते  देखना  चाहते  हैं  उस  पर  focus करिए , उस  बारे  में  बात  करिए  ना  की  ऐसी  चीजें  जो  आप  नहीं  चाहते  हैं . For example: यदि  आप अपनी  income बढ़ाना  चाहते  हैं  तो  बढती  महंगाई  और  खर्चों  पर  हर  वक़्त  मत  बात  कीजिये  बल्कि  नयी  opportunities और  income generating ideas पर  बात  कीजिये .

इन  बातों पर  ध्यान  देने  से  आप  Self Improvement के  रास्ते  पर  और  भी  तेजी  से  बढ़ पायेंगे  और  अपनी  life को  खुशहाल  बना  पायेंगे . All the best. 🙂

25 Tips To Lose Weight in Hindi कैसे तेजी से घटाएं अपना वज़न ?

Weight Lose या Reduce  करना एक ऐसा topic है जिसपे जितने मुंह उतनी बातें सुनने कोमिलती हैं. लोग एक से बढ़कर एक tips या diet-plan बताते हैं, जिसके हिसाब से Weight Reduce  करना मानो बच्चों का खेल हो. पर हकीकत तो आप जानते ही हैं कि ये असल में कितना challenging काम है. इसीलिए मैं आज आपके साथ How to reduce weight, Hindi  में share कर रहा हूँ. मेरी कोशिश होगी की यह लेख  Hindi में इस विषय पर लिखे गए सबसे अच्छे लेखों में से एक हो.

Weight बढ़ने का विज्ञान बड़ा सीदा-साधा है. यदि आप खाने-पीने के रूप में  जितनी Calories ले रहे हैं उतनी burn  नहीं करेंगे तो आपका weight बढ़ना तय है. दरअसल बची हुई Calorie ही हमारे शरीर में fat के रूप में इकठ्ठा हो जाती है और हमारा वज़न बढ़ जाता है.

वज़न कम करने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको ये जानना चाहिए कि आपका present weight सही है या नहीं. इसके लिए आप कृपया इस लेख को पढ़ें  कैसे जानें आपका वज़न सही है या नहीं ? यहाँ से आप अपना Body Mass Index जान पायेंगे. BMI  एक बहुत ही  simple tool  है जो आपके वज़न और लम्बाई के हिसाब से आपकी body में कितना  fat  है बताता है.  आपका BMI ये बताता है कि आप किस weight category  में आते हैं:

  • 18.5 से कम – Underweight
  • 18.5  से 25 – Normal Weight
  • 25  से 29.9  – Overweight
  • 30  से ज्यादा  – Obese (अत्यधिक वज़नी)
अब यदि आप Overweight या Obese हैं तो ही आपको अपना वज़न कम करने की ज़रुरत है. और यदि आपको इसकी ज़रुरत है तो आपको ये भी जाना चाहिए कि जिस इस्थिति में आप पहुंचे हैं उसकी वज़ह क्या है. वैसे आम-तौर पर वज़न बढ़ने के दो कारण होते हैं:
  •  खानपान : Weight  बढ़ने का सबसे प्रमुख कारण होता है हमारा खान-पान. यदि हमारे खाने में कैलोरी की मात्र अधिक होगी तो वज़न बढ़ने के chances  ज्यादा हो जाते हैं. अधिक तला-भुना , fast-food, देशी घी, cold-drink  आदि पीने से शरीर में ज़रुरत से ज्यादा calories इकठ्ठा हो जाती  हैं जिसे हम बिना extra effort के burn नहीं कर पाते और नतीजा हमारे बढे हुए वज़न के रूप में दिखाई देता है. यदि आप इस बात की जानकारी रखें कि आपके शरीर को हर दिन कितने कैलोरी की आवश्यकता है और उतना ही consume करें तो आपका weight  नहीं बढेगा.
  •  Inactive होना : अगर आपकी दिनचर्या ऐसी है कि आपको ज्यादा हाथ-पाँव नहीं हिलाने पड़ते तो आपका weight बढ़ना लगभग तय है. ख़ास तौर पर जो लोग घर में ही रहते हैं या दिन भर कुर्सी पर बैठ कर ही काम करते हैं उन्हें जान-बूझ कर अपनी daily-life  में कुछ physical activity involve  करनी चाहिए. जैसे कि आप lift  की जगह सीढ़ियों का प्रयोग करें, अपने interest का कोई खेल खेलें , जैसे कि badminton, table-tennis, इत्यादि. यदि आप एक treadmill या एक gym cycle afford  कर सकें और उसे नियमित रूप से प्रयोग करें तो काफी लाभदायक होगा. वैसे सबसे सस्ता और सरल उपाय है कि आप रोज़ कुछ देर टहलने की आदत डाल लें.पर इसके अलावा भी कई कारणों से आपका वज़न बढ़ सकता है .अन्य कारणों को आप यहाँ देख सकते हैं: वज़न बढ़ने के 10 प्रमुख कारण

    अब जब आप weight बढ़ने का कारण जान गए हैं तो इसे lose या  reduce  करना आपकी इच्छाशक्ति  और जानकारी पर निर्भर करता है. यहाँ मैं Weight Lose करने की ऐसी ही कुछ TIPS HINDI में share कर रहा हूँ.उम्मीद है ये जानकारी आपके काम आएगी.

    TIPS TO LOSE WEIGHT IN HINDI

    1. सब्र  रखें   : याद   रखिये   की आज जो आपका weight है  वो कोई दो -दिन  या  दो  महीने   की  देन  नहीं  है . ये  तो बहुत  समय  से चली  आ  रही  आपकी life-style का  नतीजा  है. और यदि आपको weight loss करना है तो निश्चित  रूप  से आपको सब्र  रखना  होगा. बेंजामिन फ्रैंकलिन का  ये कथन -” जिसके पास धैर्य है वह जो चाहे वो पा सकता है.” हमेशा मुझे प्रेरित करता है. तो आप भी तैयार रहिये कि इस काम में वक़्त लगेगा. हो सकता है शुरू के एक-दो हफ्ते आपको अपने वज़न में कोई अंतर ना नज़र आये पर येही वो वक़्त है जहाँ आपको मजबूत बने रहना है, धैर्य रखना है, हिम्मत रखना है.

    2.अपने efforts में यकीन रखिये : किसी भी और चीज से ज्यादा ज़रूरी है कि आप weight loss के लिए जो efforts कर रहे हैं उसमे आपका यकीन होना.  यदि आप एक तरफ daily gym जा रहे हैं और दूसरी तरफ दोस्तों से ये कहते फिर रहे हैं कि जिम-विम जाने का कोई फायदा नहीं है तो आपका subconscious mind भी इसी बात को मानेगा, और सच-मुच आपको अपने एफ्फोर्ट्स का कोई रिजल्ट नहीं मिलेगा. खुद से positive-talk करना बहुत ज़रूरी है. आप खुद से कहिये कि, ” मैं फिट हो रहा हूँ”, ” मुझे results मिल रहे हैं” , आदि.

    3.Visualize करिए : आप जैसा दिखना चाहते हैं वैसे ही खुद के बारे में सोचिये. यकीन जानिये ये आपको weight lose करने में मदद करेगा.आप चाहें तो आप अपने कमरे की दीवार, या कंप्यूटर स्क्रीन पर कुछ वैसी ही फोटो लगा सकते हैं जैसा कि आप दिखना चाहते हैं. रोज़ खुद को वैसा देखना उस चीज को और भी संभव बनाएगा.

    4.नाश्ते के बाद , पानी को अपना main drink  बनाएं : नाश्ते के वक़्त orange juice, चाय , दूध इत्यादि ज़रूर लें लेकिन उसके बाद पुरे दिन पानी को ही पीने के लिए इस्तेमाल करें. कोल्ड-ड्रिंक को तो छुए भी नहीं और चाय-कॉफ़ी पर भी पूरा control रखें .इस तरह आप हर रोज़ करीब 200-250 Calories कम consume करेंगे.

    5.Pedometer का प्रयोग करें: ये एक ऐसी device है जो आप के हर कदम को count करता  है. इसे अपने बेल्ट में लगा लें और कोशिश करें की हर रोज़ 1000 Steps extra चला जाये. जिनका weight अधिक होता है वो आम तौर पर दिन भर में बस दो से तीन हज़ार कदम ही चलते हैं. यदि आप इसमें 2000  कदम और जोड़ दें तो आपका current weight बना रहेगा और उससे ज्यादा चलने पर वज़न कम होगा.एक standard pedometer की कीमत 1000 से 1500 रुपये तक होती है.

    6.अपने साथ एक छोटी सी diary रखें : आप जो कुछ भी खाएं उसे इसमें लिखें. Research में पाया गया है कि जो लोग ऐसा करते हैं वो औरों से 15% कम calories consume करते हैं.

    7.जानें आप  कितनी calories लेते हैं, और उसमे 10% add कर दें: यदि आपको लगता है कि आप हर रोज़ 1800 कैलोरी लेते हैं और  फिर भी आपका वज़न control नहीं हो रहा है तो शायद आप अपनी calorie intake का गलत अनुमान लगा रहे हैं. आम तौर पर यदि आप अपने अनुमान में 10% और जोड़ दें तो आपका अनुमान ज्यादा accurate हो जायेगा. For Example: 1800 की जगह 1800 + 180 = 1980 Calorie.

    8.तीन time खाने की बजाये 5-6 बार थोडा-थोडा खाएं: South Africa में हुई एक research में ये पाया गया की यदि व्यक्ति  सुबह, दोपहर, शाम  खाने की बजाये दिन भर में 5-6 बार थोड़ा-थोड़ा खाए  तो वो 30% कम कैलोरी consume करता है. और यदि वह  उतनी  ही कैलोरी ले  रहा है जितना की वो तीन बार खाने में लेता  है तो भी  ऐसा करने से body कम insulin release करती  है , जो की आपके blood sugar को सही रखता  है और  आपको भूख  भी कम लगती  है.

    9.रोज़ 45 मिनट  टहलिए  : रोज़ 30 मिनट टहलना आपका weight बढ़ने नहीं देगा लेकिन यदि आप अपना weight घटाना चाहते हैं तो कम से कम 45 मिनट रोज़ टहलना  चाहिए. अगर  आप रोज़ ऐसा कर लेते हैं तो बिना  अपना खान – पान बदले  भी आप साल  भर में 15Kg वज़न कम कर सकते हैं. और यदि आप ये काम सुबह सुबह ताज़ी हवा  में करें तो बात  ही कुछ और है. पर इसके लिए आपको डालनी  होगीसुबह जल्दी उठने  की आदत .

    10.नीले रंग का अधिक प्रयोग करें: नीला रंग भूख को कम करता है. यही वजह है कि अधिकतर restaurants इस रंग का प्रयोग कम करते हैं. तो आप खाने में blue plates use करें , नीले कपडे पहने, और टेबल पर नीला tablecloth डालें.इसके opposite red,yellow, और orange color खाते वक़्त avoid करें, ये भूख बढाते हैं.

    11.अपने पुराने कपड़ों को दान कर दें : एक बार जब आप सही weight पा चुके हैं तो अपने पुराने कपडे, जो अब आपको loose होंगे, उन्हें किसी को दान कर दें. ऐसा करने से दो फायदे होंगे. एक तो आपको कुछ दान कर के ख़ुशी होगी और दूसरा आपके दिमाग में एक बात रहेगी कि यदि आप फिर से मोटे हुए तो वापस इतने कपडे खरीदने होंगे. ये बात आपको अपना weight सही रखने के लिए encourage करेगी.

    12.खाने के लिए छोटी plate का प्रयोग करें: अद्ध्यनो से पता चला है कि चाहे आपको जितनी भी भूख लगी हो; यदि आपके सामने कम खाना होगा तो आप कम खायेंगे, और यदि ज्यादा खाना रखा है तो आप ज्यादा खायेंगे. तो अच्छा होगा कि आप थोड़ी छोटी थाली उसे करें जिसमे कम खाना आये. इसी तरह चाय -कॉफ़ी के लिए भी छोटे cups प्रयोग करें.बार बार खाना लेना आपका calorie intake बढाता है इसलिए आपको जितना खाना है उसी हिसाब से एक ही बार में उतना खाना ले लें.

    13.जहां खाना खाते हों वहाँ सामने एक शीशा लगा लें: एक  study में ये पाया गया कि शीशे के सामने बैठ कर खाने वाले लोग कम खाते हैं. शायद खुद को out of shape देखकर उन्हें ये याद दिलाता हो कि weight कम करना उनके लिए बेहद ज़रूरी है.

    14.Water-rich food खाएं:  Pennsylvania State University  की एक research में पाया गया है कि water-rich food , जैसे कि टमाटर,लौकी, खीरा, आदि खाने से आपका overall calorie consumption कम होता है.इसलिए इनका अधिक से अधिक प्रयोग करें.

    15.Low-fat milk का प्रयोग करें:  चाय , कॉफ़ी बनाने में, या सिर्फ दूध पीने के लिए भी skim milk use करें, जिसमे calcium ज्यादा होता है और calories कम.

    16.90% खाना घर पर ही खाएं: अधिक से अधिक घर पर ही खाना खाएं, और यदि आप बाहर भी घर का बना खाना ले जा सकते हों तो ले जायें. बाहर के खाने में ज्यादातर high-fat और  high-calorie होती हैं.इनसे बचें.

    17.धीरे-धीरे खाएं: धीरे खाने से आपका ब्रेन पेट भर जाने का सिग्नल पहले ही दे देगा और आप कम खायेंगे.

    18.तभी खायें जब सचमुच भूख लगी हो: कई बार हम बस यूँहीं खाने लगते हैं. कई लोग आदत, boredom, या nervousness की वज़ह से भी खाने लगते हैं. अगली बार तभी खाएं जब आपको वाकई में भूख सहन ना हो. यदि आप कोई specific चीज खाने के लिए खोज रहे हैं तो ये भूख नही बस स्वाद बदलने की बात है, जब सच में भूख लगेगी तो आपको जो कुछ भी खाने को मिलेगा आप खाना पसंद करेंगे.

    19.जूस पीने की बजाये फल खाएं: जूस पीने की बजाये फल खाएं, उससे आपको वही लाभ होंगे, और जूस की अपेक्षा फल आपकी भूख को भी कम करेगा, जिससे overall आप कम खायेंगे.

    20.ज्यादा से ज्यादा चलें: आप जितना ज्यादा चलेंगे आपकी calories उतना ही अधिक burn  होंगी. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, आस-पास पैदल जाना  आपके लिए मददगार साबित होगा. घर में भी आप दिन भर में एक-दो बार अपनी छत का चक्कर लगाने की कोशिश करें. छोटे-छोटे efforts बड़ा result देंगे.

    21.हफ्ते में एक दिन कोई भारी काम करें: हर हफ्ते कोई एक भारी काम या activity करें. जैसे की आप अपनी bike या  car  धोने का सोच सकते हैं, बच्चों के साथ कहीं घूमने जाने का plan कर सकते हैं, या अपने spouse की हेल्प करने के लिए घर की सफाई कर सकते हैं.

    22.ज्यादातर कैलोरीज़ दोपहर से पहले कंस्यूम कर लें:  Studies से पता चला है कि जितना अधिक आप दिन के वक़्त खा लेंगे रात में आप उतना ही कम खायेंगे.और दिन में जो calories आपने consume की है उसके रात तक burn हो जाने के chances अधिक हैं .

    23.डांस करें: जब कभी आपको वक़्त मिले तो बढ़िया music लगा  कर dance करें. ऐसा करने से आपका मनोरंजन भी होगा और अच्छी-खासी calories भी burn हो जाएँगी. यदि आप इसको routine में ला पाएं तो बात ही क्या है.

    24. नींबू और शहद का प्रयोग करें : रोज सुबह हल्के गुनगुने पानी के साथ नीबू और शहद का सेवन करें.ऐसा करने से आपका वज़न कम होगा. यह उपाय हमारे पाठक Mr. V D Sharma जी ने अपने अनुभव के मुताबिक बताया है. ऐसा करके उन्होंने अपना वज़न १० किलो तक कम किया है.उम्मीद है यह आपके लिए भी कारगर होगा.

    25. दोपहर में खाने से पहले 3 ग्लास पानी पीयें : ऐसा करने से आपको भूख कुछ कम लगेगी, और यदि आप अपना वज़न कम करना चाहते हैं तो भूख से थोडा कम खाना आपके लिए लाभदायक रहेगा.

    याद रखिये कि weight reduce करने के लिए आपको सब्र रखना होगा. छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर आप इस काम को तेजी से कर पायेंगे. और इस दौरान आप जो कर रहे हैं उस पर यकीन करना बहुत ज़रूरी है.Hope these tips will help you to reduce weight fast. All the best. :)