Job Interview में सफल होने के 10 Tips

1)  CV /  Resume  को  बनाने  में   पूरी  सावधानी  बरतें :
आपकी  CV का  मकसद  अपने  potential employer को  यह  दिखाना  होना  चाहिए  की  क्यों  आप  इस  जॉब  के  लिए  best person हैं .आपकी  CV ही  आपसे  related वो  पहली  चीज  होती  है  जो  Interviewer के  सामने  जाती  है .कह  सकते  हैं  कि  उनकी  नज़रों  में  यही  आपका  first impression होता  है . अगर  interviewer को  CV अच्छी  नहीं  लगी , या  उसमे  बचकानी  mistakes दिखीं  तो  आपके  लिए  उसका  perception खाराब  हो  सकता  है . और  ये  भी  ध्यान  रखें कि  आपकी  छोटी  छोटी  बातें  कहीं   ना  कहीं  आपकी  बड़ी -बड़ी  हरकतों  की  ओर  भी  इशारा  करती  हैं . अगर  कोई  व्यक्ति  अपनी  CV बनाने   में  असावधान  है  तो  job में  भी  उसके  ऐसा  करने  के  काफी  chances हैं , और  ये  बात  interviewer अच्छी  तरह  से  जानता  है .

मैं  यहाँ  CV कैसे  बनाएं , ये  तो  नहीं  बता  सकता  पर  कुछ  important points ज़रूर  share कर  सकता  हूँ  जिस  पर  आपको  ध्यान  देना  चाहिए :
         आपकी  CV का  look professional होना  चाहिए .

         बड़े -बड़े  paragraph की  जगह  bullet points use करें  , ये   interviewer को  CV पढने  के  लिए  ज्यादा  प्रेरित  करते  हैं .

         कोई  भी  Spelling mistake नहीं  होनी  चाहिए .

         अगर  CV दो  page में  बन   सकती  है  तो  जबरदस्ती  उसे  चार  page का  ना  बनाएं .

         अलग -अलग  job के  हिसाब  से  अपनी  CV में  थोड़े – बहुत  बदलाव  करें .

         उन  points को  highlight करने  की  कोशिश  करें  जो  इस  job से  related हों.

         CV बनाने  के  बाद  दो-चार  लोगों  से  उसे  पढवा  लें .

2)   Job से  related theoretical knowledge को  special attention दें :

 

मैं  पिछले  5-6 साल  से  Insurance field से  related हूँ . इस  sector की  मुझे  ठीक – ठाक  knowledge है , पर  जब  कभी  कोई  interview schedule होता  है  तो  मैं  अपनी  पुरानी  books, PPTs, और  अन्य  resource material अच्छी  तरह  से  दोहराता  हूँ .
Job से  सम्बंधित  theoretical knowledge को  बराबर  importance दें , मैं  कुछ  ऐसे  लोगों  को  जानता  हूँ  जिनके  पास  practically काम  कैसे  होता  है  इस  बात  की  अच्छी  knowledge है  , पर  वो  technical terms और  theory में  lack करते  हैं  , और  इस  वजह  से  उन्हें  interview में  उतनी   सफलता  नहीं  मिल  पाती . आप  इस  तरह  की  गलती  ना  करें , और  theoretical knowledge को  कम  ना  आंकें .
अगर  मैं  अपनी  बात  करूँ  तो  interview की  पूरी  preparation का  60% time इसी  काम  में  देता  हूँ . यहाँ  पर  दिया  गया  effort और  चीजों  को  आसान  बना  देता  है , आपका  confidence बढ़  जाता  है , और  आप  जो  answers देते  हैं  उसमे  ये  साफ़  झलकता  भी  है . Interviewer भी  शुरआती  answers की  quality से   ही  जान  लेता  है  कि  आप  एक  well prepared candidate हैं  या  एक  casual candidate.
Interview को  कभी  casually नहीं  लेना  चाहिए , यह  एक  competition है , आपको  खुद  को  दूसरों  से  बेहतर  साबित  करना  होता  है . और  आप  किसी  भी  department में  कोताही नहीं  बरत  सकते .  इसलिए आप  जो भी  interview देने  जा  रहे  हैं  उस  field से  related theoretical knowledge पर  अतिरिक्त   ध्यान  दें .
मैं  यहाँ  practical knowledge को  इसलिए  emphasize नहीं  कर  रहा  हूँ  क्योंकि  यदि  आप  एक  fresher हैं  तो  आपसे  practical knowledge expected नहीं  है  और  यदि  आप  exeperienced हैं  तो  definitely आपके  पास  practical knowledge होगी  ही .
3) खुद  को  Employer की  जगह  रख  कर  देखें :
ये  सोचिये  कि  अगर  आप  Interviewer होते  तो  एक  ideal candidate के अन्दर क्या  खोजते . जो  job vacancy है  उसकी  specific need को  समझने  की  कोशिश  कीजिये , और  उन  needs को  पूरा  करने  के  लिए  जो  qualities चाहिएं  उसे  interview में   showcase कर  सकते  हैं.दूसरी तरफ आप उन qualities को छुपा भी सकते हैं जो इस जॉब के लिए फिट नहीं बैठतीं.

4) Frequently Asked Questions( FAQs) की  तैयारी  ठीक  से  कर  लें :
Job  interviews में  कुछ  questions बहुत  ही  common होते  हैं , जो  लगभग  हर एक  interview में  पूछे  जाते  हैं . ऐसे  questions की  तैयारी  अच्छे  से   कर  लें  , और  साथ  ही साथ उन  questions के  बारे  में  भी  सोच  लें  जो  आपके  जवाब  के  बदले  आपसे  पूछे  जा  सकते  हैं .
यहाँ  मैं  ऐसे  questions की  एक  छोटी  सी  list दे  रहा  हूँ :
Tell me about Yourself ? / Walk me through you CV?/ Introduce yourself/ अपने  बारे  में  हमें  बताएं ?

Do you want to ask any question? / क्या आप  कोई  प्रश्न    पूछना  चाहते  हैं  .  ( Inerview के  अंत  में  ये  पूछा  जा  सकता  है .)

Tell us about your  current  job, what is your role?/  अपनी  मौजूदा  नौकरी  के  बारे  में  बताएं , आपका  काम  क्या  है ?

Why do you want to join this company? / आप  ये  company क्यों  join करना  चाहते  हैं ?

Why is there a gap in your studies/ job ? आपकी  पढाई /job में  gap क्यों  है ?

Why do you want to leave your current job? / आप  अपनी  मौजूदा  नौकरी  क्यों  छोड़ना  चाहते  हैं ?

What are your weaknesses / strengths ? / आपकी  weakness/ strength क्या  है ?

 Why should we select you? /हम  आपका  चयन  क्यों करें  ?

 Why did you chose this specialization? आपने  यह  specialization क्यों  किया ?

 Why your marks are very low in xyz exam? Xyz exam में  आपके  marks इतने  कम  क्यों  हैं ?

What has been your biggest achievement till date? / अब  तक  की  आपकी  सबसे  बड़ी  achievement क्या  रही  है ?

इसके  अलावा  आपकी  industry से   related कुछ  common questions भी  पूछे  जा  सकते  हैं , इसलिए  ऐसे  प्रश्नों  की  study पहले  से  ही detail में  कर  लें .
In questions की  तैयारी  करने  का  मतलब  ये  नहीं  है  कि  इन्हें  रटा जाए . ये  इसलिए  है  कि  आपकी  mental clarity बनी  रहे . In questions के  answers की  एक  outline आपके  mind में  तैयार  होनी  चाहिए  , और  interview के  समय  उसे  अपने  शब्दों  में  बोलने  के  लिए  तैयार  रहना  चाहिए .
For example: अगर  कोई  अचानक  ही  आपसे  आपकी  strength पूछ  ले  तो  आप  कोई  ना  कोई  उत्तर  ज़रूर  दे  लेंगे  पर  हो  सकता  है   बाद  में   आपको  लगे  की  आप  अपनी  सबसे  बड़ी  खूबी  बताने  से  ही  चूक  गए  हैं , लेकिन  अगर  आप  पहले  से  prepared रहेंगे  तो  ऐसी  गलती  नहीं  होगी .
 5) Mind में  पूरा  interview process कई  बार  run कर  लें :
जब  भी  मुझे  interview देना  होता  है  तो उससे  पहले  मैं  4-5 बार  पूरा  का  पूरा  interview अपने  mind में  run कर  लेता  हूँ . और  ये  बहुत  ही  detailed होता  है .
इसमें  मैं  सुबह  उठने  से  लेकर  interview खत्म होने  तक  की  छोटी  से  छोटी  बात  के  बारे  में  सोचता  हूँ .ऐसा  करने  से  mind कई  चीजों  को  लेकर  बिलकुल  clear हो  जाता  है . जैसे  कि  कब  उठाना  है , क्या  revise करना  है , क्या  पहन  कर  जाना  है , कैसे  जाना  है , कब  तक  पहुचना  है , क्या -क्या  लेकर  जाना  है , कैसा  gesture रखना  है , कैसे  खुद  को  introduce करना  है , etc.

6) Mock & Mirror Practice
MBA के  दौरान  campus selection से  पहले  मैंने  कई  बार  mock interviews दिए  थे , और  अपने  friend Dheeraj के  साथ  मिलकर  बहुत लोगों  के  mock interviews लिए  भी  थे , हमने  इन  interviews को  web-cam से  record भी  किया  था , जिसे  देखकर  लोगों  को  काफी  फायदा  हुआ   था . अगर  आपको  Interview देने  का  अधिक  अनुभव  नहीं  है  तो  आपको  भी  Mock Interviews जरूर  देने  चाहियें . मौक   interview conduct करने  के   लिए  आप  अपने  किसी  ऐसे  friend या  senior से  request कर  सकते  हैं  जो  आपको  एक   सही  feedback दे  सके . इस  activity को  बहुत  seriously कीजिये , ये  आपको  बहुत  कुछ  सीखा  सकती  है . क्योंकि  अक्सर  हम  खुद  जो  गलतियाँ  करते  हैं  वो  हमें  दिखाई  नहीं  देतीं , लेकिन  और  कोई  उन्ही  चीजों  को   आसानी  से  point कर  सकता  है .
ये  ध्यान  दें  कि  कहीं  इस  activity से   आपका  confidence कम  ना  हो .  यहाँ  interview लेने  वाले  को  समझदारी  दिखानी  होगी  कि  वो  आपकी  improvement areas भी  बताये  और  आपका  confidence भी  बढ़ाये . अगर  आपको  लगता  है  कि  इस  activity से  आपका  confidence lose हो  सकता  है  तो  इसे  ना  करें . इसकी  जगह  आप  खुद  शीशे  के  सामने  बैठ  कर  अपना  interview दें , और  चाहें  तो  उसे  अपने  mobile में  record भी  कर  लें . जब  आप  अपने  answers सुनेंगे  तो  आपको  खुद -बखुद  कुछ  improvement areas दिख  जायेंगी .
7) Non-Verbal Communication पर  ध्यान  दें :
हम  जो  communicate करते  हैं  वो  सामने  वाले  तक  दो  तरह  से  पहुँचता  है . Verbally और  Non-Verbally.
Verbally , यानि  जो  हम   बोलते  हैं  , या  लिखते  हैं , और  Non-Verbally बाकी  चीजें , हम  कैसे, किस  tone में  बोलते  हैं , हमारे  बैठने  का  तरीका , eye contact, even  हमारा  dressing sense. अलग -अलग  research के  मुताबिक़  हमारे  total communication में  सिर्फ  20% verbal होता  है  और  80% Non-verbal.
इसलिए  इस  80% पर  ध्यान  देना  बहुत  ज़रूरी  है . आपको   interviewer से  interact करते  वक़्त  कुछ  बातों  का  ध्यान  देना  होगा :
आपको  देखकर  लगे  की  आप  इस  job में  genuinely interested हैं .ऐसा  आप  अच्छे  से  dress up होकर  , time से  venue पर  पहुंच  कर  कर  सकते  हैं .

आपकी  आवाज़  dull नहीं  होनी  चाहिए , enthusiasm और  confidence show करना  बहुत  ज़रूरी  है .

 पहली  बार  मिलते  वक़्त    हलकी  सी  smile ज़रूरी  है , और  interview के  दौरान  भी  आपको  एक  friendly gesture रखना  चाहिए .

 Job के  लिए  आपका  जोश  आपकी  तैयारी  से  साफ़  झलकेगा , इसलिए  अपना  homework अच्छे  से  कर  के  interview देने  जाएं . Specially, company के  बारे  में  आपको  अच्छी  जानकारी  होनी  चाहिए  , और  आपकी  field से  related current developments भी  पता  होने  चाहिएं .

Note:अपना confidence level improve करने के लिए आप इस लेख को पढ़ सकते हैं. 
8 ) Contradictory answers ना  दें  :
Interviewer आपकी  honesty  check करने  के  लिए  , या  बस  यूहीं  कुछ  ऐसे  प्रश्न    पूछ  सकते  हैं  जिनका  उत्तर  एक -दूसरे  से   related हो .
For example: अगर  आप  पहले  कह  चुके  हैं  कि  ये  आपकी  dream company है , पर  जब  ये  पूछा  जाता  है  कि  ये  company क्या – क्या   service देती  है  , और  आप  ठीक   से  नहीं  बता  पाते  हैं , तो  येही  message जाता  है  कि  एक  तरफ  तो  ये  आपकी  dream company है  और  दूसरी  तरफ  आप  इसके  बारे  में basic जानकारी भी नहीं रखते हैं तो  इसका  मतलब   आप  honest नहीं  हैं .
या  मान  लीजिये आपने  CV में  अपनी  hobby Playing Cricket लिखी  है , और  interview में  Playing Chess बताते  हैं  तो  definitely interviewer को  आप  पर  doubt होगा .
Interview में  सच  बोलना  ही  सही  रहता  है , पर  यदि  आप  excitement या  nervousness में  कुछ  अधिक  बोल  गए  हों  तो  उस  उत्तर पर टिके रहिये , और  पूरे  interview के  दौरान  उसे  contradict मत  करिए .
9) जिस   भाषा   में  comfortable हों   उसी   में   इंटरव्यू  दें : 
यदि  आप  English और हिंदी दोनों में  बात  करने  में  निपुण  हैं  तो  आप  ये  point skip कर  सकते  हैं  लेकिन  अगर  आप  अंग्रेजी में  comfortable नहीं  हैं  तो  आपके  लिए  एक  important point हो.

10) ये  सोच  कर  चलें  कि  Selection हुआ   तो  अच्छा  नहीं  तो  कुछ  इससे  भी  अच्छा  होगा :
Interview में  select होने  के  लिए  बहुत  over conscious मत  होइए . अगर  आप  select नहीं  होते  हैं  तो  भी  दुनिया  इधर  की  उधर  नहीं  होने  वाली , in fact कुछ  महीनों  बाद  शायद  आपको  याद  भी  ना  रहे  कि  आप  ऐसे किसी  interview में  appear हुए  थे . Positive attitude रखने  वाले  ये  मान  कर  चलते  हैं  कि  जो  होता है  अच्छा  होता  है.

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Self-confidence बढाने के 10 प्रैक्टिकल तरीके

1)  Dressing sense improve कीजिये :आप  किस  तरह  से  dress-up होते  हैं  इसका  असर  आपके  confidence पर  पड़ता  है । ये  बता  दूँ  कि  यहाँ  मैं  अपने  जैसे आम लोगों  की  बात  कर  रहा  हूँ , Swami Vivekanand और  Mahatma Gandhi जैसे  महापुरुषों  का  इससे  कोई  लेना  देना  नहीं  है , और  यदि  आप  इस  category में  आते  हैं  तो  आपका  भी :)।
 मैंने  खुद  इस  बात  को  feel किया  है , जब  मैं  अपनी  best attire में  होता  हूँ  तो  automatically मेरा  confidence बढ़  जाता  है, इसीलिए  जब  कभी  कोई  presentation या  interview होता  है  तो  मैं  बहुत  अच्छे  से  तैयार  होता  हूँ । दरअसल  अच्छा  दिखना  आपको  लोगों  को  face करने  का  confidence देता  है  और  उसके  उलट  poorly dress up होने  पे  आप  बहुत conscious रहते  हैं ।
मैंने  कहीं  एक  line पढ़ी  थी-
 आप  कपड़ों  पे  जितना  खर्च  करते  हैं  उतना  ही  करें , लेकिन  जितनी  कपडे  खरीदते  हैं  उसके  आधे  ही खरीदें।
 आप भी इसे अपना सकते हैं।

वो  करिए   जो  confident लोग  करते  हैं :
आपके  आस -पास  ऐसे  लोग  ज़रूर  दिखेंगे  जिन्हें  देखकर  आपको  लगता  होगा  कि  ये व्यक्ति  बहुत  confident है । आप  ऐसे  लोगों  को  ध्यान  से  देखिये  और  उनकी  कुछ  activities को  अपनी  life में  include करिए । For example:
Front seat पर  बैठिये ।

Class में , seminars में , और  अन्य  मौके  पर  Questions पूछिए / Answers दीजिये

अपने चलने और बैठने के ढंग पर ध्यान दीजिये

दबी  हुई  आवाज़  में  मत  बोलिए ।

Eye contact कीजिये , नज़रे  मत  चुराइए।

3)  किसी  एक   चीज  में  अधिकतर  लोगों  से  बेहतर   बनिए :

 

हर  कोई  हर  field में  expert नहीं  बन सकता  है, लेकिन  वो  अपने  interest के  हिसाब  से  एक -दो  areas चुन  सकता  है  जिसमे  वो  औरों  से  बेहतर  बन  सकता  है । जब  मैं   School में  था  तो  बहुत  से  students मुझसे  पढाई  और  अन्य  चीजों  में  अच्छे  थे , पर  मैं  Geometry  में  class में  सबसे  अच्छा  था (thanks to Papa :)), और  इसी  वजह  से  मैं  बहुत  confident feel करता  था।  और  आज  मैं  AKC को  one of the world’s most read Hindi Blog बना  कर  confident feel करता  हूँ। अगर  आप  किसी  एक  चीज  में  महारथ  हांसिल  कर  लेंगे  तो  वो  आपको  in-general confident बना  देगा । बस  आपको  अपने  interest के  हिसाब  से  कोई  चीज  चुननी  होगी  और  उसमे  अपने  circle में  best बनना  होगा, आपका  circle आप पर  depend करता  है , वो  आपका  school, college, आपकी  colony या  आपका  शहर  हो  सकता  है।
आप  कोई  भी  field चुन  सकते  हैं, वो कोई  art हो  सकती  है , music, dancing, etc कोई  खेल  हो  सकता  है , कोई  subject हो  सकता  है  या  कुछ  और जिसमे आपकी expertise  आपको  भीड़  से  अलग  कर  सके  और आपकी  एक  special जगह  बना  सके । ये  इतना  मुश्किल  नहीं  है , आप  already किसी  ना  किसी  चीज  में  बहुतों  से  बेहतर  होंगे , बस  थोडा  और  मेहनत  कर  के  उसमे  expert बन  जाइये, इसमें  थोडा  वक़्त   तो  लगेगा ,  लेकिन  जब  आप  ये  कर  लेंगे  तो  सभी  आपकी  respect करेंगे  और  आप  कहीं  अधिक  confident feel करेंगे ।
और  जो  व्यक्ति  किसी  क्षेत्र  में  special बन  जाता है  उसे  और  क्षेत्रों  में  कम   knowledge होने की चिंता  नहीं होती, आप  ही  सोचिये  क्या  कभी सचिन  तेंदुलकर इस  बात  से  परेशान  होते  होंगे  कि  उन्होंने  ज्यादा  पढाई  नहीं  की …कभी  नहीं !

 4)  अपने  achievements  को  याद  करिए  :
आपकी  past achievements आपको  confident feel करने  में  help करेंगी। ये  छोटी -बड़ी  कोई  भी  achievements हो  सकती  हैं । For example: आप  कभी  class में  first आये  हों , किसी  subject में school top किया  हो , singing completion या  sports में  कोई  जीत  हासिल  की हो,  कोई  बड़ा  target achieve किया  हो , employee of the month रहे  हों । कोई  भी  ऐसी  चीज  जो  आपको  अच्छा  feel कराये ।
आप  इन  achievements को dairy में  लिख  सकते  हैं, और  इन्हें  कभी  भी  देख  सकते  हैं, ख़ास  तौर  पे  तब  जब  आप  अपना  confidence boost करना  चाहते  हैं । इससे  भी  अच्छा  तरीका  है  कि  आप  इन  achievements से  related कुछ  images अपने  दिमाग  में  बना  लें  और  उन्हें  जोड़कर  एक  छोटी  सी  movie बना  लें  और  समय  समय  पर  इस  अपने  दिमाग  में  play करते  रहे । Definitely ये  आपके  confidence को  boost करने  में मदद  करेगा ।
5) Visualize करिए  कि  आप  confident हैं :
आपकी  प्रबल  सोच  हकीकतबनने  का  रास्ता  खोज  लेती  है , इसलिए  आप  हर  रोज़  खुद  को  एक   confident person के  रूप  में  सोचिये । आप  कोई  भी  कल्पना  कर  सकते  हैं , जैसे  कि  आप  किसी  stage पर  खड़े  होकर  हजारों  लोगों  के  सामने  कोई  भाषण  दे  रहे  हैं , या  किसी  seminar hall में  कोई  शानदार  presentation दे  रहे  हैं , और  सभी  लोग  आपसे  काफी  प्रभावित  हैं , आपकी  हर  तरफ  तारीफ  हो  रही  है  और  लोग  तालियाँ  बजा  कर  आपका  अभिवादन  कर  रहे  हैं । Albert Einstein ने  भी  imagination को  knowledge से अधिक  powerful बताया  है ; और  आप  इस  power का  use कर  के  बड़े  से  बड़ा  काम  कर  सकते  हैं।
6) गलतियाँ   करने  से  मत  डरिये:

7)  Low confidence के  लिए  अंग्रेजी  ना  जानने  का  excuse मत  दीजिये :
हमारे  देश  में  अंग्रेजी  का वर्चस्व  है । मैं  भी  अंग्रेजी  का ज्ञान  आवश्यक  मानता  हूँ ,पर  सिर्फ  इसलिए  क्योंकि  इसके  ज्ञान  से  आप  कई  अच्छी  पुस्तकें , ब्लॉग , etc पढ़  सकते  हैं , आप  एक  से  बढ़कर  एक  programs, movies, इत्यादि  देख  सकते  हैं । पर  क्या  इस  भाषा  का  ज्ञान  confident होने  के  लिए  आवश्यक  है? नहीं ।  English जानना  आपको  और  भी  confident बना  सकता  है  पर  ये  confident होने  के  लिए  ज़रूरी  नहीं  है । किसी  भी  भाषा  का  मकसद  शब्दों  में  अपने  विचारों   को  व्यक्त   करना  होता  है , और  अगर  आप  यही  काम  किसी  और  भाषा  में  कर  सकते  हैं  तो आपके लिए अंग्रेजी  जानने  की  बाध्यता  नहीं  है।
मैं  गोरखपुर  से  हूँ , वहां  के  सांसद  योगी  आदित्य  नाथ  को  मैंने  कभी  अंग्रेजी में  बोलते  नहीं  सुना  है , पर  उनके  जैसा  आत्मविश्वास  से  लबरेज़  नेता  भी  कम   ही  देखा  है । इसी  तरह  मायावती और  मुलायम  सिंह  जैसे  नेताओं में  आत्मविश्वास  कूट -कूट  कर  भरा  है  पर  वो  हमेशा  हिंदी  भाषा का  ही  प्रयोग  करते  हैं ।
दोस्तों, कुछ  जगहों  पर  जैसे  कि job-interview में  अंग्रेजी  का  ज्ञान  आपके  चयन  के  लिए  ज़रूरी  हो  सकता  है, पर  confidence के  लिए  नहीं , आप  बिना  English जाने  भी  दुनिया  के  सबसे  confident  व्यक्ति  बन  सकते  हैं ।

8 ) जो  चीज  आपका आत्मविश्वास  घटाती  हो  उसे  बार-बार  कीजिये :
कुछ  लोग  किसी  ख़ास  वजह  से  confident नहीं  feel करते  हैं । जैसे  कि  कुछ  लोगों में  stage-fear होता  है  तो  कोई  opposite sex के  सामने  nervous हो  जाता  है । यदि  आप  भी  ऐसे  किसी  challenge को  face कर  रहे  हैं  तो  इसे beat करिए । और  beat करने  का  सबसे  अच्छा  तरीका  है  कि  जो  activity आपको  nervous करती  है  उसे  इतनी  बार  कीजिये  कि  वो  आपकी ताकत  बन  जाये । यकीन  जानिए  आपके  इस  प्रयास  को  भले  ही शुरू  में  कुछ  लोग  lightly लें  और  शायद  मज़ाक  भी  उडाएं  पर  जब  आप  लगातार अपने efforts  में लगे  रहेंगे  तो  वही  लोग  एक  दिन  आपके  लिए  खड़े  होकर  ताली  बजायेंगे ।
 गाँधी जी की कही एक  line मुझे  हमेशा  से  बहुत  प्रेरित  करती  रही  है  “पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे।”  तो  आप  भी  उन्हें  ignore करने  दीजिये , हंसने  दीजिये , लड़ने  दीजिये, पर  अंत  में आप  जीत जाइये । क्योंकि  आप  जीतने  के  लिए  ही  यहाँ  हैं , हारने  के  लिए  नहीं ।
9) विशेष  मौकों  पर  विशेष  तैयारी  कीजिये :
सफलता  के  लिए  आत्म-विश्वास  आवश्यक  है, और आत्म-विश्वास   लिए तैयारी-Arthur Ashe
जब  कभी  आपके  सामने  खुद  को   prove करने  का  मौका  हो  तो  उसका  पूरा  फायदा  उठाइए । For example: आप  किसी  debate, quiz , dancing या  singing competition में  हिस्सा  ले  रहे  हों , कोई  test या  exam दे  रहे  हो ,या  आप  कोई  presentation दे  रहे  हों , या  कोई  program organize कर  रहे  हों । ऐसे  हर एक  मौके  के  लिए  जी -जान   से  जुट  जाइये  और  बस  ये  ensure करिए  कि  आपने  तैयारी  में  कोई  कमी  नहीं  रखी, अब  result चाहे जो भी  हो  पर  कोई  आपकी  preparation को  लेकर  आप  पर  ऊँगली  ना  उठा  पाए।
Preparation और  self-confidence directly proportional हैं । जितनी  अच्छी  तैयारी  होगी  उतना  अच्छा  आत्म -विश्वास  होगा।और  जब  इस  तैयारी  की  वजह  से  आप  सफल  होंगे  तो  ये  जीत  आपके life की success story में  एक  और  chapter बन  जाएगी  जिसे  आप  बार -बार  पलट  के  पढ़  सकते  हैं  और  अपना  confidence boost कर  सकते  हैं ।
10)Daily अपना  MIT पूरा  कीजिये :
कुछ  दिन  पहले  मैंने  AKC पर  MIT यानि  Most Important Task के  बारे  में  लिखा  था , यदि  आपने  इसे  नहीं  पढ़ा  है  तो  ज़रूर  पढ़िए । यदि  आप  अपना  daily का  MIT पूरा  करते  रहेंगे  तो   निश्चित  रूप  से  आपका  आत्म -विश्वास  कुछ  ही  दिनों  में  बढ़  जायेगा । आप  जब  भी  अपना  MIT पूरा  करें  तो  उसे  एक  छोटे  success के  रूप  में देखें  और  खुद  को  इस  काम  के  लिए  शाबाशी  दें ।रोज़  रोज़  लगातार  अपने  important tasks को  successfully पूरा  करते  रहना  शायद  अपने  confidence को  boost करने का सबसे  कारगर  तरीका  है ।  आप इसे ज़रूर try कीजिये।

स्वामी विवेकानंद का युवाओं को संदेश 

​स्वामी विवेकानंद का युवाओं को संदेश 
LAST UPDATED: JANUARY 12, 2015 BY GOPAL MISHRA 10 COMMENTS

 

आज अत्याधुनिक युग में भी अनेक युवा; स्वामी विवेकानंद जी की बातों का अनुसरण करते हैं एवं उनके उपदेशों को आत्मसात करने का प्रयास कर रहे है। युवाओं में अत्यधिक लोकप्रिय स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं की जिज्ञासाओं का

Swami Vivekananda
समय-समय पर अत्यधिक सहज और तर्क संगत तरीके से समाधान किया है। स्वामी जी के अनेक प्रसंग आज भी हम सभी के लिए पथ-प्रदर्शक हैं। ऐसे ही एक प्रसंग को आप सबसे साझा करने का प्रयास कर रहे हैं।

 

स्वामी विवेकानंद जी जब अलवर प्रवास पर थे तब एक दिन कुछ युवा अपनी जिज्ञासा शांत करने स्वामी जी के पास उपस्थित हुए। इस तरह की बैठक लगभग रोज ही हुआ करती थी। स्वामी जी के प्रभाव का ऐसा असर हुआ कि अलवर में युवाओं का एक समूह बन गया, जो पूर्ण सन्यास नही लेना चाहता था किन्तु आध्यात्म के नियमों के अनुसार जीवन को धर्म की मर्यादा में रहकर जीना चाहता था।
उन युवकों में पूरन नाम का एक युवक था , उसने बात शुरू करते हुए स्वामी जी से कहा कि, स्वामी जी मेरी एक व्यक्तिगत समस्या है। स्वामी जी बोले निसंकोच अपनी समस्या कहो; हो सकता है तुम्हारी समस्या और भी भाइयों से सम्बंधित हो। स्वामी जी के अपनेपन की भावना से अभीभूत होकर  पूरन बोला “स्वामी जी न तो मैं भिक्षा माँग सकता हूँ और न अपने माता-पिता को असहाय अवस्था में छोङ सकता हूँ। घर परिवार की जिम्मेदारी हेतु मुझे आजीविका तो चाहिये।”
स्वामी जी बोले, “आजीविका किसे नही चाहिये पुत्र !”
  पूरन आगे बोला, “स्वामी जी आप हमें सच्चाई से जीना सिखाते हैं,  ईमानदारी और साहस जैसे गुणों की चर्चा करते हैं।  सात्विक और निस्वार्थ सेवा से परिपूर्ण जीवन जीने के लिये कहते हैं; किन्तु क्या ये संभव है?  जो व्यक्ति नौकरी में है, उसके लिये तो ये सेवा निःस्वार्थ नही हो सकती क्योंकि हम इसे आजीविका के रूप में करते हैं। बदले में वेतन लेते हैं और यदि व्यापार की बात करें तो, व्यापार  सत्य एवं सरलता से संभव नही है। व्यापार में तो सच-झूठ बोलना ही पड़ता है। ऐसे में हम इस संसार में नैतिकता की रक्षा कैसे कर सकते हैं।”

स्वामी जी मुस्कराते हुए बोले,  तुम्हारी पीड़ा यथार्त है पुत्र ! नौकरी करते हुए एक बात स्मरण रखो कि तुम जिसके पास नौकरी कर रहे हो, वह तुम्हारा स्वामी है किन्तु तुम्हारा एक स्वामी और भी है, उसने तुमको ये जीवन दिया और इस सृष्टी की रचना की है। नौकरी किसी की भी करो;  किन्तु अपने वास्तविक स्वामी के विरुद्ध कैसे जा सकते हो। यदि स्वार्थवश किसी का अहित करते हो तो अपने वास्तविक स्वामी का उलंघन करते हो। थोङा ईश्वर पर भरोसा करना सीखो,  सत्य के लिये थोङा भरोसा करना सीखो। स्वामी जी हँसते हुए बोले ” अपने सांसारिक लोभ की रक्षा करते हुए हम सात्विक जीवन नही जी सकते। हित और लोभ में अंतर समझो। लोभ में हित नही होता। हित का लोभ करो, लोभ का हित नही। सांसारिक लोभ के प्रवाह में आत्मा का पतन हो जाए तो ये लाभ का सौदा नही है।”
स्वामी जी  थोडा. रुके , फिर चर्चा को आगे बढाते हुए बोले “तुमने कृषी की चर्चा ही नही की। तुम देख रहे हो, जो युवक अंग्रेजी के दो अक्षर पढ लेते हैं वो अपने गॉव को छोङ कर नौकरी के लिये शहर की ओर भाग रहे हैं। वहाँ वह कुर्सी पर बैठकर ऐसे काम करना चाहते हैं कि कपङे और हाँथ गंदे न हों भले ही आत्मा चाहे कितनी भी मलीन हो जाए।”
बातचीत इतनी आत्मीयता के वातावरण में हो रही थी कि और भी युवक बेझिझक अपनी जिज्ञासा को प्रश्नों के माध्यम से पूछ रहे थे। सरमा नामक युवक ने स्वामी जी से कहा कि, खेती में तो न सम्मान है और न पैसा है। जिसको देखिये किसान को हाँककर अपना काम करवा लेता है। ज़मींदार, सरकारी अधिकारी, गॉव का बनिया सब उसके स्वामी बन जाते हैं।

 

स्वामी जी बोले पुत्र, ” अपने स्वभाव को पहचानों और अपने स्वधर्म को जानो। हम लोग एक भूल करते हैं कि, अपने वंश या व्यवसाय के अनुसार अपना स्वभाव बनाने का प्रयत्न करते हैं। जबकि होना चाहिये कि हम अपने स्वभाव के अनुसार अपना व्यवसाय चुनें। अपना वंश चुनना हमारे हाँथ में नही है।”

सरमा वापस बोला, किन्तु स्वामी जी अब किसान क्या कर सकता है! अपने बेटे के हाँथ में हल और बैल ही पकङा सकता है और उसी तरह बनिया अपने बेटे को दुकान पर ही तो बैठा सकता है!
स्वामी जी ने कहा कि पुत्रों एक कथा सुनाता हुँ,  गुरु नानक एक खत्री परिवार के घर में जन्म लिये थे। खत्री संभवतः आरंभ में क्षत्रिय थे; किन्तु किसी समय उनके क्षत्रिय संस्कार छूट गये और वे खत्री हो गए। जब नानक बङे हुए तो उनके व्यापारी पिता ने उन्हे कुछ पुंजी दी और सौदा करके आने को कहा। गुरु नानक अपने वंश के अनुसार नही चले, वे अपने स्वभाव के अनुसार चले। अपनी आर्थिक पूंजी उन्होने आर्थिक लाभ के किसी व्यापार में नही लगाई। वे उसे गरीबों में बांट आए। घर लौटने पर उनके पिता ने पूछा “सौदा कर आए? उन्होने उत्तर दिया, हाँ पिता जी ! सच्चा सौदा कर आया।”
नानक जी की कथा सुनकर सरमा बोला, “स्वामी जी वे गुरु नानक थे इसलिये ऐसा कर पाए। हम साधारण जन ऐसा कैसे कर सकते हैं?”
स्वामी विवेकानंद हँस पङे और बोले ” ये तो सत्य है कि वे गुरु नानक थे, इसलिये ऐसा कर सके; किन्तु तुम अपना विकास कर,  महान पुरुषों के समान व्यवहार क्यों नही कर सकते- यह क्यों नही मानते हो कि  तुममें भी वही ब्रह्म है, जो महान पुरुषों में विद्यमान है। स्वयं पर विश्वास करना  सीखो।
इसबार धनराज ने प्रश्न किया, स्वामी जी ये सब तो ठीक है! पर मुझे आप बताइये कि किसान का बेटा चाहे तो कैसे पढ सकता है और पढ भी जाए तो समय नष्ट करने के सिवाय उसका लाभ क्या होगा?
स्वामी जी बोले पुत्र, ” राजा जनक को स्मरण करो. उनके एक हाँथ में हल था और दूसरे में हाँथ में वेद। इसका अर्थ समझते हो?”
स्वामी विवेकानंद जी ने समझाते हुए कहा कि इसका अर्थ है, “राजा जनक कृषी और ज्ञान को एकसाथ महत्व दे रहे थे। वे सांसारिक ज्ञान और और आध्यात्मिक ज्ञान दोनो का महत्व समझते थे और इसलिये वे किसी की भी उपेक्षा नही करते थे। वैसे राजा जनक अपने राजा के धर्म को निभाने के लिए हल रख कर तलवार भी उठाने में सक्षम थे।”
धनराज ने पूछा कि स्वामी जी राजा जनक का वर्ण क्या था?

स्वामी जी ने कहा कि, ” यदि मुझसे पूछोगे तो मैं यही कहुंगा कि वे ब्राह्मण थे क्योंकि उनका स्वभाव एक अनासक्त ज्ञानी का स्वभाव था; किन्तु प्रजापालन के लिए वे कृषि को महत्व देते थे और प्रजारक्षा के लिए शस्त्रों को। हमारे यहाँ आजकल यह हो रहा है कि जिसको ज्ञान है वह कृषि नही कर रहा और जो कृषि कर रहा उसे किसी प्रकार का ज्ञान नही है। हमें वैज्ञानिक ढंग से खेती करनी चाहिए,  ताकि हमारे खेतों की उपज बढे। हमारे युवक पढ-लिख कर नगरों की ओर नही गाँवों की ओर बढे। हमारे गॉव में जो ज्ञान की भूख है, उसे देखो। पढा-लिखा आदमी जाकर जब ग्रामीणों के बीच बैठता तो वे उसका सम्मान करते हैं। इस प्रकार ऊँच-नीच का भेद कम होता है। समाज में समरसता आती है। स्वामी जी सरमा की तरफ मुखातिब होते हुए बोले सरमा ! तुम भी ज्ञान प्राप्त करके खेती करो।”
स्वामी विवेकानंद जी ने सभी युवाओं की तरफ देखते हुए कहा कि, “तुम लोग संस्कृत और अंग्रेजी दोनो पढो। संस्कृत इसलिए कि अपने देश, अपने धर्म , अपने प्राचीन ज्ञान को जान सको और अंग्रेजी इसलिए कि पश्चिम से आए आधुनिक ज्ञान से परिचित हो सको।”
मित्रों, ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि स्वामी विवेकानंद जी ने युवाओं को आने वाली परेशानियों से बचाने के लिए अति-उत्तम उपाय बतायें हैं। आजकल की परिस्थिती पर यदि गौर करें तो अनेक युवा गॉव से शहर पढने आते हैं और आज की गलाकाट मंहगी शिक्षा का बोझ उनके माँ-बाप को कर्ज के रूप में उठाना पङता है। आलम ये है कि शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात युवा गॉव वापस नही जाते क्योंकि व्हाईट कॉलर वाले युवाओं को मिट्टी में काम करना रास नही आता। शहर के हालात ये है कि ज्यादा तनख्वाह की उम्मीद लिये युवकों को उचित रोजगार नही मिलता जिससे वे गलत रास्ते का चयन करके स्वयं को बरबादी के रास्ते पर ले जाते हैं और माँ-बाप की उम्मीद पर पानी फेर देते हैं।
मित्रों, स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस पर हम सब उनके सपनो को साकार करने का प्रण करें और उनके द्वारा बताई गई युवाओं की विशेषता को अंगीकार करें क्योंकि विवेकानंद जी के अनुसार, युवा वो है जो अनिति से लङता है, दुर्गुणों से दूर रहता है, काल की चाल को अपने सामर्थ से बदल सकता है। राष्ट्र के लिए बलिदान की आस्था लिये एक प्रेरक इतिहास रचता है। जोश के साथ होश लिये सभी समस्याओं का समाधान निकाल सकता है। वो सिर्फ बातों का बादशाह नही है; बल्की उत्तम कर्मों द्वारा उसे साकार करने में सक्षम है।
जय भारत 

गुरु-शिष्य की वो मुलाक़ात जिसने स्वामी विवेकानंद का जीवन बदल दिया!

​भारतीय इतिहास के संक्रान्ति काल में अपने गुरु के मंगल आशीर्वाद को शिरोधार्य कर के युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी ने धर्म, समाज और राष्ट्र में समष्टि-मुक्ती के महान आदर्श को प्रस्तुत किया। गुरु रामकृष्ण परमहंस के विचारों को अमृत समान मानने वाले स्वामी विवेकानंद जी जब पहली बार रामकृष्ण से मिले तो उनके मन में रामकृष्ण के प्रति एक विरोधाभास विचार उत्पन्न हुआ था। इस मुलाकात का प्रसंग “न भूतो न भविष्यति” में देखने को मिलता है। ये प्रसंग स्वामी विवेकानंद बनने से पूर्व का है।

भारतीय इतिहास के संक्रान्ति काल में अपने गुरु के मंगल आशीर्वाद को शिरोधार्य कर के युगपुरुष स्वामी विवेकानंद जी ने धर्म, समाज और राष्ट्र में समष्टि-मुक्ती के महान आदर्श को प्रस्तुत किया। गुरु रामकृष्ण परमहंस के विचारों को अमृत समान मानने वाले स्वामी विवेकानंद जी जब पहली बार रामकृष्ण से मिले तो उनके मन में रामकृष्ण के प्रति एक विरोधाभास विचार उत्पन्न हुआ था। इस मुलाकात का प्रसंग “न भूतो न भविष्यति” में देखने को मिलता है। ये प्रसंग स्वामी विवेकानंद बनने से पूर्व का है।
सुरेश बाबु की बात को मानते हुए नरेन्द्र ने कहा, “अच्छा! मैं चलूँगा, किन्तु एक बात कह देता हूँ कि न तो मैं आपके समान उनको अपना गुरु समझुंगा और ना ही उनके कहने पर ब्रह्म समाज छोडूंगा।
सुरेश बाबु नरेन्द्र को लेकर ठाकुर(रामकृष्ण परमहंस) के पास गये। उस समय ठाकुर पूर्व की ओर मुख किये प्रसन्नवदन कर रहे थे। उनके वचन सुनने में नरेन्द्र तल्लीन हो गये। जब ठाकुर की नज़र नरेन्द्र पर पड़ी तो उन्होने कहा कि-
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तुम कक्ष में चटाई पर बैठो।
इतने में सुरेश बाबु ने कहा कि, ये वही है जिसने गाना गाया था। ठाकुर ने नरेंद्र की ओर देखा और पूछा कि, और क्या सीखा है कोई बंगला भजन भी गाते हो।
नरेन्द्र ने कहा बंगला गीत तो दो चार ही आता है। इसपर ठाकुर ने गीत गाने को कहा और हारमोनियम की व्यवस्था भी करवा दी।

नरेन्द्र ने “मन चलो निज निकेतन” गाया, गीत के मध्य में ही ठाकुर अंतर्मुखी हो गये और गीत समाप्त होते-होते ठाकुर की चेतना बहर्मुखी हो गई। वे उठे और वे नरेन्द्र का हाँथ पकड़ कर बाहर बरामदे में उत्तर की ओर खींचते हुए ले गये और एक कमरे में प्रवेश कर गये। ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि जौहरी (ठाकुर, रामकृष्ण परमहंस) को हीरे की परख हो गई थी। ठाकुर ने कमरे की कुंडी लगा दी ताकि कोई और आ न सके। नरेन्द्र को देखकर उनकी आँखों से आनन्द के आसुओं की धारा बहने लगी थी। नरेन्द्र की तरफ मुखातिब होकर ठाकुर कहने लगे कि,

 

तू इतने दिनों पश्चात आया। मैं किस प्रकार तेरी प्रतिक्षा करता रहा, तू सोच नही सकता।
नरेन्द्र अचंभित उनको देखते रहे। ठाकुर नरेन्द्र के सामने हाँथ जोड़कर खड़े हो गये और बोलने लगे “मैं जानता हूँ प्रभु! आप वही पुरातन ऋषी-नर रूपी नारायण हैं। जीवों का इस दुर्गति से उद्धार करने के लिये आपने पुनः संसार में अवतार लिया है।”
नरेन्द्र स्तंभित भाव से ठाकुर को देखते रहे। सहसा ठाकुर बोले ठहरो यहीं मेरी प्रतिक्षा करो कहीं जाना नही। ठाकुर कक्ष से बाहर निकल गये।
नरेन्द्र ने चैन की सांस ली और सोचने लगे कि किस पागलखाने में फंस गया। विचित्र सा चेहरा बनाकर वहीं बैठे रहे क्योंकि ठाकुर का आदेश उन्हे सम्मोहन की भाँति वहीं रोके रहा। लेकिन मन में ही वार्तालाप करने लगे कि, मैं तो नरेंन्द्र नाथ हूँ, विश्वनाथ का पुत्र परंतु ये तो ऐसे समझ रहे हैं कि मैं अभी आकाश से उतरा कोई देवता हूँ।

कुछ समय पश्चात ठाकुर कक्ष में प्रवेश किये, उनके हाँथ में माखन मिश्री और कुछ मिठाईयां थी। वे अपने हांथो से नरेन्द्र को मिठाईयां खिलाने लगे। नरेन्द्र ने उनको रोकते हुए कहा कि आप मुझे दे दिजीये मैं अपने मित्रों संग बांटकर खा लूंगा।
ठाकुर के आग्रह में ऐसी शक्ति थी कि नरेन्द्र ज्यादा मना नही कर सके। उनके मुख पर भी माखन लग गया था। ठाकुर भावविभोर खिलाते रहे और पूछते रहे कि, तू शीघ्र ही एक दिन अकेला मेरे पास आयेगा। आयेगा न बोल नरेन्द्र ने स्वीकृती में सर हिला दिया। तब ठाकुर ने कक्ष के कपाट खोल दिये और बाहर आ गये एवं अपने आसन पर जाकर ऐसे बैठ गये मानो कुछ हुआ ही नही।
तभी ठाकुर अपने शिष्यों को सम्बोधित करते हुए कहने लगे कि, “देखो नरेन्द्र सरस्वती के प्रकाश से किस प्रकार दीप्तिमान हैं।”
लोग चकित नरेन्द्र को देखने लगे। नरेन्द्र इस बात से चकित होकर ठाकुर की तरफ देखने लगे।
तभी ठाकुर ने नरेन्द्र से पूछा, “रात को निद्रा से पूर्व क्या तुम्हे कोई प्रकाश दिखाई देता है?”
“विस्मित होकर नरेन्द्र ने कहा जी हाँ! और पूछा, क्या अन्य लोगों को दिखाई नही देता?”

ठाकुर ने दृष्टीउठाकर उपस्थित लोगों से कहा, “देखो ये लड़का अपने जन्म से ही ध्यानसिद्ध है।” तुम लोगों को जैसे देख रहा हूँ, वैसे ही ईश्वर को भी देखा जा सकता है उससे बात की जा सकती है।
लेकिन क्षणिक ही दुखी होते हुए बोले कि, “ऐसा चाहता कौन है? कौन ये कहकर दुःखी होता है?
जैसा नरेन्द्र ने गाया “जाबे कि हे दीन आमार विफले चालिए”, ईश्वर को व्याकुल होकर पुकारो तो वे अवश्य दर्शन देते हैं।
नरेन्द्र मुग्ध भाव से ठाकुर को देखते रहे। फिर उनके पास पहुँच कर अबोध बालक की तरह आँख में आँख डालकर ठाकुर से पूछे कि क्या आपने ईश्वर के दर्शन किये हैं?
ठाकुर खिलखिलाकर हँसे और बोले हाँ मैने देखा है।
नरेन्द्र को ऐसे उत्तर की आशा नही थी वे स्तब्ध रह गये। ठाकुर के विश्वास और ढृणता के कायल हो गये। नरेन्द्र हाँथ जोड़कर बाहर निकल लिये उनके साथ उनके मित्र भी बाहर निकल लिये।
मित्रों, सर्वविदित है कि स्वामी विवेकानंद जी ने अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण की शिक्षाओं का सम्पूर्ण विश्व में संदेश दिया। स्वामी जी के लिये स्वामी रामकृष्ण के आदेश अमृत समान थे।
आइये आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन पर उनका वंदन करते हैं और उनकी दी गई शिक्षाओं को आत्मसात करने का संक्लप करते हैं।

​SIX IMPORTANT GUIDELINES IN LIFE.

જીવનમાં ઉતારવા જેવા દિશા સુચનો:
1. *_When you are Alone, Mind your Thoughts._*

જ્યારે તમે એકલા હો ત્યારે તમારા વિચારોને કાબુમાં રાખો
2. *_When you are with Friends, Mind your Tongue._*

જ્યારે તમે મિત્રો સાથે હો ત્યારે તમારી જીભ ને કાબુમાં રાખો
3. *_When you are Angry, Mind your Temper._*

જ્યારે તમે ગુસ્સામાં હો ત્યારે તમારા મગજ ને કાબુમાં રાખો
4. *_When you are with a Group, Mind your Behavior._*

જ્યારે તમે સમુહ મા હો ત્યારે તમારી વર્તણુક કાબુમાં રાખો
5. *_When you are in Trouble, Mind your Emotions._*

જ્યારે તમે મુશ્કેલી મા હો ત્યારે તમારા મનોભાવ ને કાબુમાં રાખો
6. *_When God starts blessing you, Mind your Ego._*

જ્યારે ઇશ્વર ના આશીર્વાદ તમારા પર હોય ત્યારે અભિમાન ને કાબુમાં રાખો.